जयपुर नरेश की इग्लैंड यात्रा | Jaipur Naresh Ki England Yatra

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Jaipur Naresh Ki England Yatra by माधव सिंह बहादुर - Madhav Singh Bahadur

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about माधव सिंह बहादुर - Madhav Singh Bahadur

Add Infomation AboutMadhav Singh Bahadur

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
यूरोप निवासी तो इल जयनगर की इसकी सुन्दरता के कारण हिन्दुस्तान का पेरिस कहते हैं । आए उनही सहाराज रापसिंहुज्ली के उच्तराणिकारी हैं कि जो ह्य हुनर के पूरे कररदान थे । दहु स्वभाव के गम्भीर रही मिन्‍्नाबी और अत्यन्त बुद्धिमाद्‌ धे । उन्होंने क सुखक (छए ईयासत ल अनक उत्तत्षकाये वह शहर जयपुर को ओर भी सुन्दर बनाने के रह क त॑राङ का^ कए) ই जूर महाराजा साहिब बहादुर ने ऐसे प्राचीन प्रसिद्ध तथा उच्च क्षत्रियवंश में शुभ मित्ती भाद़ों बद़ि नवसी ९ सम्बत्‌ १९१८ मुताबिक तारीख ३१. अगस्त | ` १५६१ ई. स्थान इसरा में जन्म लेकर ओर | 5 महाराज शमसिहर्जी के वेछुण्ठ बासहोंने पर एवेक्त । 2, 7 8 29 ९, श्ध्वे গু 31) - बा. < हो? 4 9 > व ६ न १ २ (390:ए- 7 भपआा७काएथ्काक:-मकरमता कन्या জজ পাই ভা सतया শসা পয ৫০9 प्‌ ठिकाने से गोइ आकर ता. २९ सितम्चर सन १८८० इ. को राज जयपुर के राज्य सिंहासन को सुशोमित किया और | | उस समय से अवतक वर्मसाग में स्थित रहतेहुए जो कर्तव्य |. - | पालन किया है वह विश्व में विख्यात है । आप भी रघुकुलके | | प्राचीन प्रसिद्ध पूवजे। के समान एकही सर्यादा पालन करने वाले हैं আল লাস ক चारों अङ्ग पितृभक्ति, गुरुमक्ति, इश्वर | भक्ति और राजभक्ति का भलीप्रकार पालन किया है । वर्तमान লব आपके सदृह राजभंक्त तथा इंश्वरभक्त बहुत कम राजा नज़र आते हैं| सरकार गवर्मेन्टने भी आपके अदढल राजभक्ति और सुप्रदन्ध से प्रसन्न होकर आपको समय २ पर अनेक उपाधियों से विभूषित कियाहै। इसही कारण শক সস তা পাপ সা 3 ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now