हिन्दी के आदि कालीन काव्य रूपों का अध्ययन | Hindi Ke Aadi Kalin Kavya Roopon Ka Adhyayan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
36 MB
कुल पष्ठ :
606
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जध्याव « |ভর. বরাত ০০ « জট এআ সি পে টে অপরিচিত१हन्दी साद्य के जआदकाल की पृष्ठभीम
काल-वमाणन व नामकरणहन्दी प्ताहित्य के दसवीं ते पौठदवी फ्राब्दी
के अआरीम्फ रचनाकात को इतहासकारों ने आदिकात कहा हे ।
इन पार सो पर्णो के अन्तत एक ही तमय तथा पररस्कीत्यों
प्र ¶ष्ली गई ¶न्दी की गतापि रघनागौँ म इतनी अपथ
वीमनन्नतवा है, जो कसी के 1लए भरी कौठहल का ¶वषय बन
तकता है | 1हन्दी ताहहत्य का यह उद्भव काल या आराम्फ
` काल अत्यन्त ¶पवादास्पद होते हुए भी स्व्यं भ अत्या
मह त्वपुर्णं অয তে, + ¶विभन्नता चतू्ुूषी त्य ते दष्ट
गोचर हो रही थी । इस काल में एक ओर संतत के प्रतभाणाती
विद्वान उत्पन्न हुए, इन विद्वानों ने अलंकृत काप्य परम्परा्रन्य
पद्यौ के अनुतार अपने काव्य का पुनन किया | उनकी ये
रचनाएँ अलैकृत জাত परम्परा के सर्पश्रेष्ठ 'श्वर पर पहुंच गई थीं ।
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