शिवाजी | Shivaajii

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Shivaajii by सर जदुनाथ सरकार - Sir Jadunath Sarakar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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र्‌ प्रान्तका करीब अट्डाईस हजार वर्ग-मीलका प्रदेश सममा जाता था; अर्थात्‌ नासिक, पूना और सतारा ये तीनों जिले परे, अहमदनगर तथा शोलापुर जिलोका कुछ हिस्सा; उत्तरमें तापती नदौसे लेकर दक्तिणमें कृष्णा नदीकी पहली शाखा वणों नदी तक ओर पूब॑में सीना नदीसे लेकर पश्चिमकी ओर सक्याद्वि (पश्चिमी घाठ ) के पहाड़ों तक । सह्याद्रि पार होकर अरब-समुद्र तक फैली हुई जो लम्बी जमीन है, उसके उत्तरके आधे हिस्सेको कोंकण कहते हैं ओर उसके दक्तिणके भागको कनाडा और मलाबार कहते हैं । इसी कोंकण-अदेशके थाना, कोलाबा ओर रक्ञागिरी नामके तीन जिले और इन्हीं जिलोंसे लगा हुआ सावन्तवाडी नामका देशी राज्य, यों कुल मिलाकर यह सारा प्रदेश करीब दस हजार वर्ग-मीलका है । यहांके बहुतेरे लोग ञ्रजकल मराठी बोलते हैं, परन्तु ये सब्र लोग जातिके मराठा नहीं हैं । खेती-बारी ओर जमीनकी हालत महाराष्ट्र देशमें पानी कम बरसता है और वह भी ठिकानेसे नहीं, इस कारण यहाँ अन्न कम उपजता है। किसान साल-भर मेहनत करके किसी तरह पेठ भरने मात्रके लिए फसल तैयार करता है। फिसी किसी साल इतनी भी फसल तेयार नहीं होती । सूखी पहाड़ी जमीनमे धान पैदा नहीं होता, तथा जो और गेहूँ भी बहुत कम होते हैं इस देशकी खास फसल ओर साधारण लोगोंके खानेकी चीजें केवल जुआर, बाजरा और मक्का हैं। कभी कभी पानी न पड़नेके कारण सारी फसल सूख जाती है और जमीनका ऊपरी भाग जलकर धूलके रंग-सा हो जाता है; कोई भी चीज हरी नहीं बचती, ओर अनगिनती औरत-मर्द, गाय-बढ़ुड़े भूखों मर जाते हैं । इसी




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