जातक [खंड 2] | Jataka [Vol 2]

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Jataka [Vol 2] by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पिपय पृष्ठ २१० कन्दगछफ जातव' রি ३३४ [[ कन्दगकक ने खद्रिवन में रहनेवाते कठफोरनी पक्षी की भक्त कर अपनी जाने गेंवाई । ] ७. पीरणत्यम्मक वर्ग ३३७ २११ सोमदत्त जातक ३३७ [पुत्र पिता को सिखा पढावर राजा से दो वैल माँगने लगयय । पिता ने राजा से चैल मांगने के वदने वदा-- बैल लें 1] २१२ उच्छिद्ुभत्त जातक 4 ३४० [ ब्राह्मणी ने अपने पति को झपने जार का बूटा भात खिलाया । ] २१३ भरु जातक ३४३ [ম राजा ने रिश्वत ले वट वृक्ष मे लिए भंगडते वाल तपस्वियों का कंगडा बढाया । ] २१४ पुण्णनदी जातक ३४७ [ राजा ने क्रोधित हो अपने बुद्धिमान पुरोहित को निकाल दिया था। पीछे उसके गुणा को याद कर कौवे का मास भेज कर वुलाया । ] २१५ कच्छप जातक ४ ३४६. [ दस-वच्च म्रपनी चोघ म एक लक्डी पर क्टुवको लिए जा रह थे। उसने चुप न रह सकते के कारण राकाया स गिरकर जान ग्रेंवाई। 1] २१६ मच्छ जातक 5; [ कमी भच्छ ने मच्छुप्रा से प्राण की भिक्षा मनी 1] ३१७ सेग्गु आवक ইহ [ पिता न पुत्री के ववारपन की परीक्षा की । ]




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