मेरे कुछ मौलिक विचार | Mere Kuch Molik Vichar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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च~ > 7 ননরিনি ৩ এটে कह # ^रामचरिन के तीन गायक ३है | ये दोनों भाषाएं 'हिन्दी-संघ! की प्रमुख भाषाएं है । परन्तु कहा यही जाता है कि “रामचरित-मानस' अवधी भाषा का काब्य |ये तीन रामचरित के प्रमुख गायक है इनका तथा इनकी काव्य- कुतियों का विधद विवेचन इस छोटे-स लेख में क्या होगा ! सल्लेप में आगे परिचय दिया जायगा ।१. वाल्मीक ओर उनका 'पोलस्त्यवध कार्य'वाल्मीकीय रामायण' के प्रमुख टीकाकार श्वीमान्‌ राम महादय ने लिखा है कि वल्मीक नाम के कोई ऋषि थे । उनके पत्र बास्मीकि । यो वाल्मीकि नाम नहीं, नाम का विशेषण टहरता है, जैसे হাহহনি? । परन्तु यह विद्यपण ही नाम के रूप में चल দলা, অক লাম লাম भूल ही गये ! बादशाह अकबर का नाम कितने लाग जानते है ? अकबर तो उनके महत्व के लिए लगाया गया दह्द # । नाम था-'जलालु ददीन,' जो प्राय: लुप्त ही हो गया । हिन्दी के महछाकवि भूषण का सलाम थी लृ्त है। 'कवि-भूषण की पदवी उन्हीं दी गई थी । एिर 'कविश्यण लोग कहने लग । जम 'भूएण नाम, और कवि उसका विशेषण, সান “भषण ही नाम प्रसिद्ध हो गया । वस, कुछ यही स्थिति वान्मीहा मनि को है ।सरस्वती-उपासक मुनियों में कवल वाल्मीकि देश ही नाम अमर है, হান सव लुप्त हो गये। भरतम॒नि तो बहत बाद व है । इसी तरह अमुर-कबियों में “उद्चना' का नाम लिया जाता /-- कवीनामशना: कविः' “उछना -शुत्र: । शुत्ष (असूरों के गुरु, नेता तथा महाकबि) का नाम 'उच्चना था। वे वीर-भाव (वीये वीरता) के पुज थ, अपनी मतसंजीवनी काव्य-शकव्ति के कारण । इसलिए उन्हें शुक्र कबि कहा गया। कालान्तर में शुक्र कवि ही प्रसिद्ध हो गये और उनका नाम (उशच्नना) भी कृप्ण- जय वीरता-प्रेरकों की ही जानकारी तक रह गया । नाम भर वाल्मीकि की कृति का शेष है, पर घझुत्र कवि की क॒ति का नाम भी लुप्त हो गया ।एक दूसरे वाल्मीकि भक्‍षत हए हैं दवापर में, जिन्हें युधिप्टिर के राजम्‌य-यत्न म भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने उजागर किया, जौर सर्वोपरि महत्व दिया । ये भक्त वाल्मीकि सफाई का काम करनेवाले हरिजिन (भगी)११११ = 124१११११११११५.५ च




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