भारतीय संविधान तथा नागरिकता | Bharatiya Savidhan Tatha Nagarikta

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Book Image : भारतीय संविधान तथा नागरिकता  - Bharatiya Savidhan Tatha Nagarikta

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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डे आरतोय सविधान तथा नागरिकता में जो फुछ कम्पनी के भषिकार में हैँ उसके पयापें उसके उत्तराधिकारी हैँ। सन १८५३ के प्ाज्ञाउत्र में यह कहा को भूमि तथा गाय तब वक के लिये कम्पनी को प्रयान किये जाते है कि पलियामेंट कोई झन्य झदेश ने दे। इससे यह स्पप्ट था कि विमि चाश्यिामेंट भारत में कम्पती के शासन को झन्‍्त करने का सोच रहो थो। ४४७ का विद्रोद:--कम्पनी का राज्य भारत में स्थापित हो गया या। कट भारतीक ररे को पदविधि कर दिर च्य या? न्यते फक्क आवनाओं का कोई मादर नहो ঘা ओर न यह लाने मो कोट चेष्टा नौ नई थी कि भारतीय जबता कम्पती के राज्ये से मन्तुप्ट है भथदा स्रस्तुप्ट। इठ सब दातो का फल यह्‌ हुमा कि अनन्तोप यडने लया नोट सन्‌ १८५७ में घिडोड़ फूट पढ़ा! इसने एक समय तो विदेशों शासन की जड़ हिला दी थी पर अन्त में भारतीयों की प्रापसी फूट के कारण यहे झसकड रहा। गमे अरव इन्दिया देक्ट :--इस विद्रोह के पदचात्‌ ओंग्रेजो सरकार भें कम्पनी के हाथ से समस्त शक्ति छीन छेने क्न निदचय त्रिदा जीर इत प्रार्‌ द्ेघ-शासन का, जिसका प्रारम्भ सन्‌ १७७३ में हुप्रा पा, सतत हुमा। कम्पनी ने पूरा ग्रयल शियः किः उसकी शक्ति कं छोतो जावे जोर इस उद्देश्य से पालिया« मट के दोनों भवनों को सावेदत-गंत्र भी दिशा, परन्तु इसका कोई परिणाम नही लिकछा। सन्‌ १८५८ में पराव्ियामेंट ने गवेमैंट आँच इन्डिया ऐक्ट पान त्रिष्य। इसके द्वारा कम्पनी के राजनीतिक झधिकारो का चन्त ই খালা । भारत वा यान सोवा सम्राट ((20४श1) को दे दिया गया। इसके लिए एक राज्य- जंत्री नियुक्त किया गया जो कि भारत-मत्री कहत्मयया। उत्तम सहायतायै एक १५ सदरयां की भारत कौस्सिल को नियुक्ति तो गईं। दसमें ८ तो यज्माए द्वारा निमुन्त तथा ७ वा कोटं सांव डायरेभेम्‌ दवारा निर्वालन तय हुआ। इस प्रकार कोर्ट आँव डायरेफ्ट्स के हाथ से सब शक्ति छीन छी गई। नारत-कौन्निद के अत्येक्त सदस्य का १२०० पोड प्रति वर्य, चेतन विस्चित हम्ता। इस বাতি का भआारत-मपी अध्यक्ष था। कौन्पिक का बाय उप्तको सलाह देना भा। वह সাদি की राय के विरुद्ध भी निर्णेय कर सख्या था / না के सदस्य तया उनके कार्यालय (1013 ०1०४) . का ब्यय भारत को देता पड़ा। भारते-मंत्री को प्रतिवर्ष पालछियागेंट के रन्मंख * 5 य. अव्यय. 9. হি ৪৮103235055) এ এ




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