सोवियत समाज का इतिहास | Soviyat Samaj Ka Itihas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पर सैनिकों और पुलिस द्वारा राइफल से गोलियो वी बौछार होने लगी। पैज्नोग्राद की सडके मजदूरों के खून से रगी गयी। लेकिन यह पव व्यथ गया! १२ माच, १६१७ क श्रत तक पेन्नोग्राद जनता कै हाथो म श्रा चुका था। निरकुश चारशाही का तख्ता उलट चुका था। संश्राट निकोलाई द्वितीय ने राजत्याग के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिये। रूस की जनता मे, जो आज तक पैरो तले रौदी जाती और सभी अधिकारों से वचित थी, आजादी की सास ली। परतु निरकुश शासन का अत होने से देश के समक्ष तात्कालिक समस्याओं का श्रपनें आप समाधान नहीं हुआ। फरवरी, १६१७ काति का श्रत नही, उसकी शुरूझात थी। मगर फरवरी क्राति के बिना अक्तूबर क्राति नहीं हो सकती थी। निरकुश शासन का अत समाजवादी ऋति वै सधप मे एतिहासिक रूप से अनिवाय वीच की मजिल धा। दोहरी सत्ता एक कारखाने के बडे से प्रागन में मजदूरों वी भीड लगी है। तेल से सन कपड़े पहने वे आपस में बाते कर रहे है, हसी मजाक भी हो रहा है, माच की सध्याली, सम बफ को रौंदते चल रहे है। कारखाने के कायलिय से एक मेज लाकर मच बताया गया है। मेन पर एक आदमी खडा हो गया और चीखकर बोला “साथियों, हम सहा इसलिए जमा हए ह कि मज़दूरो के प्रतिनिधियों वी सोवियत के लिए, जो हमारी सत्ता होगी, अपने प्रतिनिधि चुनें।” १६१७ के वसत में इस तरह का दृश्य देश के हर कारखाने भे देवा जा सक्ता था। फरवरो क्रति कै दौरान श्रौर उसके बाद के दिनो मे हर जगह मजदूरों के प्रतिनिधिया को सोवियते कायम की गयी और सैनिक दस्ता तथा नौसेना के जहाज़ो में सैनिका और नाविकी की सेभितिया सगल्ति की गयी । देश के अधिकाश नगरों और अनक जिला के मजदूरों, सनिको तथा क्सिना की सांवियतें स्थापित हुईं। फरवरी क्राति के तुरत बाद निर्णायक शक्ति साबियता के हाथ मे भ्रा गभो) उह ्राकादौ रे बहुत बड़े बहुमत का समयन प्रान था, उनके १३




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