विदेशों के महाकाव्य | Videshon Ke Mahakavya

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Videshon Ke Mahakavya by गोपीकृष्ण - GopiKrishna
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
27 MB
कुल पृष्ठ :
262
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यूनानी महाकाव्य-संसार के मद्दानतम महाक्राव्य 'इजियडः और “आडिसी? का लेखक 'होमर” था 'मेलि- सिजिनीज़! बतलाया जाता है। १०४० और ८१० ई० के बीच का कोई समय इश्बका जीवन काल कहा जाता है । - सा के पूर्व की दूसरी शताब्दि से अब तक थह अश्न रहा है किं 'होमरः इन सहा- कार्यो का रचभिता दै श्रथवा पुराने कवि-चारण-गाग्रकों को भाँति डस समय की इन प्रमुख गाथाओ्रों का गायक-मात्र ! इस समस्या का लेकर काफी वाद-विवाद भी चलता रहा है |सम्भवतः इलियड? की मूल घटनायें ११०० ० पू० के श्रास-पास घटी, और ज्ञात होता है कि वीर गाथा युगाः अथत्रा यूनानी साहित्य के दूसरे युग में यानी ६०० ई० पू० के अंतिम वर्षो में पिप्तिस्ट्रेट्सः ने 'होमर! की कविताओं को ऋरमबद्ध कर उन्हें एक रूप देने का निरचय किया ।यह बिल्कुल रूत्य और स्पष्ट है किं 'इलियड” का कथानक अपने पूर्व की गाथाओं से अनुआशणित है अथवा, कम्त से कम्र, उनका आधार लेकर तो चल्ना ही है, क्योंकि इस तरह के पहले प्रयास में इतनी पूणाता और सोष्ठव अरुस्भव है | इसके अलावा हम इससे पूर्व के कई छोटे-बड़े बीर ग़ाथाओं के अ्रस्तित्व से अवगत भी हैं जो या तो लुप्त हो चुके हैं था अस्त-व्यस्त-रूप में मिलते हैं ।इन डपल्तब्ध गाथाश्रों में भ्रधिक्रांश किसी न किसी अकार द्वाय के युद्ध से सम्बंधित हैं, अतः हम इन्हें ट्राजन चक्र' भी कहते हैं। “धाइग्रसः के स्टेसियस? अ्रथवा 'मिलेट्सः के 'आस- হিললঃ की सादभ्निया' के 3१ भाग इनमें पमुख हैं। 'लूपिटर” के 'थीटिस” से निराशाजनक मणयका, 'पिलियस से डसके विवाह का, सोने के सेव कौ रॉम्राचक्रारी कथा का, 'पेरिवः के निर्णय का,हेलेन! के भागने का, यूनानी सेनाओं के संगठन का और द्राजन युद्ध के प्रथम नौ वर्षों की घटनाओं का इनमें विशेष वर्णन है। 'इलियड? में इनका अनुकरण किया राया है । कथानक “एकीलीज़' के उत्तेजित होने की स्थिति से आरम्भ होता है और 'हेक्टर” की अन्त्येष्टि-क्रिया पर समासत होता है ।हम इससे जनयुद्ध की कथा के उस परिणाम पर नहीं पटुँचते जिसका आरस्भ 'आके- दिनस? ने 'इथियोपिया!? के पांच भागों में किया है । ट्रा्नों की सहायता के लिये अमेज़न्सः की महारानी पं थिस्लीलिया? के आगमन की चर्चा करने के बाद कवि ऐशीलीज़-द्वारा डसके मारे जाने का विवरण देता है शोर तथ बदले में अपोजो' और 'पेरिन्तः के द्वारा 'एकीलीज़” के वध का वर्णन करता हे । 'एकीलीज़” के कवच को लेने की इच्छा के काश्ण 'पुजेक्सः और यूलिसीज़ के बीच घिड़े डत्तेजक विवाद पर इसकी समाप्ति होती है ! |




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