नारी-धर्म-शिक्षा | Naari-Dharm-Shiksha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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^ 6 नारी-धर्म-शिक्रा परति ५सम्मतियाँ इस पुस्तक की उपयोगिता के सम्बन्ध से विद्वानों विद्ुुषियों तथा सम्पादकों की बहुतेरी सम्मतियों मेंसे कुछ यहाँ संक्षिप्त रूपमें दी जाती हैं।“त्ारी-धर्म-शिक्षा ” वास्तव मे बढ़ी ही उपयोगी है । नीति,स्वास्थ्य, गरृहचिकित्सा, सन्तान-पालन,हिसाब-किताब, चिट्ठी-पत्री आदि विपयों मे सरल किन्तु स्पष्ट लिखकर श्रीमती लेखिका महा-दयाने पुस्तककी उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ा दी है। ऐसी उपयोगी “पुस्तक कन्या-बिद्यालयोकी ऊँची कक्षाओं मे रखी जा सकती है। इससे बालिकाओं का विशेष उपकार होगा। . ---पाजतीदेबीआरय-प्रतिनिधि-सभा संयुक्तप्रान्त का मुक्य साप्ताहिक पत्र आये मित्र की सलाहप्रस्तुत: पुस्तक में स्लियों के लिये ग्रहस्थी सम्बन्धी आवश्यक विषयों पर प्रकाश डाला गया है। घर के साधारण व्यवहार, भोजन-सत्कार, सीना-पिरोना, रंगना, गर्भ-रक्षा, खत्री-रोगो की तथा वाल-रोगो की चिकित्सा, चिट्ठी-पत्नी, दिसाव-क्रिताब और विधवाओं के कत्तथ्य यही इसके मुख्य विषय हैं । पुस्तक सवे- प्रिय है । इसीलिए इसके ९ संस्करण निकल चुके हैं। पुस्तक से तीन चार चित्र भी हैं। विवाह से पूर्व इस पुस्तक में बर्शित विपयों का प्रत्येक कस्या को ज्ञान होना आवश्यक हैं।आयभिन्र २३ जनवरी १९३६, ক?




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