आधुनिक पाक विज्ञान | Adhunik Pak Vigyan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
254
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ह कक 9भौजन करने से गुण विशेष उत्पन्न हो जाते दें । यदि आपने घामतिक भोजन
ভিসা प्याज, क्हुपन शामिप शादि महय किया दो आपकी ছি रूमी
मौ शद्ध नौं रदेगी शौर धित्त-एृतति शुद्ध न रहने से धर्म-कार्य में बाधा पढ़ने
की भरद्वा रहती है।
गर्भवती खी फे लि भोजनगर्भवती स्लो को भोजन सादा करना बाहिए इच्दाजुसार भोजन करना
धादिपु । प्र्येक्न स्वास्थ्य कर भौजस जिस पर मन चले भ्रवश्य खाना चाहिए ।
भीजन हस्का, खूब पका दॉना चाहिए । मीशा कम और दूध धिक देना
चाहिए । हरे शाक खूब पाने चाहिए । सन््तरे का रस पोना चाहिए भौर सन््तरा
जाना चादिए । भौषधियों से बचते रद्ना चाहिए } ष्य पाथं बिलङ्कल न
लेग पादिए । ख्वर को स्वतः शांत दोने देवा चादिए ! भौपधि मकेन
चादिषु । নল ঘোর से कई खिर को गर्म॑पात हो गया है । साधारण ज्वर थो
विशेष विंता का विषय नहीं है, परन््ठु बढ़ा और मियादी ज्वर की फौरन
बिक्रिस्सा करनो चाहिए ।থানहमारे भारतीय भोजन विधान में पांव ( नाग बेल ) या सुप शधि
को विशेष महत्व दिया जाता है । साधारण अवस्था के यहां भी पात का ब्यव-
ঘা पाया जाता है। पाव मगदी, जगन्वायी, सद्दोये वाल्ले मगदो बढड़ला या
देशों कई प्रकार के होते हैं 1.पान सद्मा न दोना चाहिए । धीड़ा लगाते समय चूना, सर, सुपारी
का अन्दाज ठीक रखता घादिए । चूदा का दूना खेर होना चादिए। सुपारी
ছে কাতান चरदिए। यद् साधारण पान का मसाला है, योढ़ा लिछोनियां
शगार लोग से को देना चाहिए ।जावियी; झुलदटी, गरो, इंच, पीपरमेंट इलायदो द्धि मी उलट
1 -सुनदते चौर रपरो गरक भो विपक्वे दै । सैर ष्टो याव यमेঅনা টু | पूना, सोम, पध्दर न्ति सरो हेच हौ हई, मोहो का भी
होता है 1
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