प्रेम पुष्पांजलि | Prem-pushpanjali  

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Prem-pushpanjali   by लाजपतराय साहनी - LajpatRai Sahni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रमुग्रेम « ५ र--प्रसुःप्रेम मजन नं ५ मु तेये प्रेम पदार्थ पाऊं। निज भक्तों फो प्रेम तुम दीना में भुखा फहां जाऊं। प्रेम ही भीतर प्रेम दी वादर प्रेम ही स लो लाऊं। ই दी प्रेम से हो मतघाला अपना आप ही भुलाऊँ। खय भेरी विनय झुनो प्रभु मेरे और किसे में सुनाऊँ। दासों फी मंडली में सांझ सवेरे तेरे दी गुण गाऊँ । नेते दी परेम प्याला पीझर विद्वासी बन जाऊँ। भजन नें० ६ प्रेम के रंग से रंगी चुरियां मुझ भिक्षुक फो दान करो 1 पापकः सोर घन्धन काटे यद्द मुश्किल आसान करो 1 यर्दा फी शीतल वारी देकर पाप ताप फी पीर हरो । प्रेम का बलूदे मुझको अपनी दी सेवा में प्रदण करो । सय धनो खाद तन मनो ध्रु यद विद्वासी तो शरण पषा




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