नारीरत्नमाला | Nariratnmala

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Nariratnmala by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कंमलादेवी तथा देवलदेवी। | ( १३) प्राणियोंके प्राण गये| निश्चयही संसारमें उपद्रवंका कारण धन जन 1] जमीन ( पृथ्वी ) यह तीनरीरै। = . ` ऋणकतां पिता शद्माता च व्यभिचारिणी । ` भाया रूपवती शदः पुत्रः शद्रः ङपण्डितः॥ जिस स्थानम रानी पद्मावती जलमरीथी वहस्थान अवभी राजप तानेमें एक तीर्थ स्थान गिना जाति ओर मंदिसे पद्मावती नामकं देदीकी प्रतिष्ठाकर रुष्य उसकी पूजा करतेंहे । कमरदेवी तथा देवरुदेवी । पाठकगणः, यद्यपि आपने कमह्दिवी तथा देवह्देवीका नाम तो नारी होमा परन्तु.उनका छेक वणेन प्रषंगवक्च किपाजाताह । कमलादेवी गुजरातकी गहीके राजामि अंतिमराना करणकी रानीथी . ओर देषरुदेषी उसकीरी पुत्रीथी जघ करण अपते दीवान माधंवकी खक उपर मोहित होकर बछात्कारपे उस्को अपने महम छाया तव दीवानं माधव छजित और क्रोषितहों उससे बदला लेनेके कारण दिल्लीको गया । उस समय दिल्लीम अलछाउद्दीन राज्य करता था। उसने बाद शाहसे गुजरातकी रसाहू भ्रमिका वणनकर उसके मनकी छलचवांये और घनके लोभमें फँपाय गुजरातपर चढाहाया । माधव केवल देश- का वणन करके उसे चढाही न छाया बरत्‌ करणकी अनीतिकोमी उस पर प्रकटकिया । लडाईमं राजा करण हारकर प्राणलेभागा । राजधानीको जीतकर बाद्शाहने वहांकी छूटकराई, उस छूटमें करण की रानी कमहदिषी उसके हाथमे पडगई निप्रको वेदौ कए्के वह्‌ दधी देगा । रप, यण ओर छावण्यतामे उप समय कमलादेवीके समान और कोई ख्री न थी। उसके इन सव गुण ओर्‌ इद्धि तीतर ताको देख बादशाह उसके ऊपर अल्यन्त मोहित होगया ओर दिल्ली : पहुँचतेही उसकी अपनी पटरानी वनाया। बादशाहका चित्त उसपर,




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