भाव तेरे शब्द मेरे | Bhav Tere Shabd Mere

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बज का + हुक লা সহ शहदहैतुम मधुर मुसकान दो गीत के स्वर साध हूँ मैं ।पुण्य जब करता रहा तो कीति का. लोलुप कहाया, साधना को स्वार्थ की ही सिद्धि का साधन बताया, पर न है चिन्ता मुझे कुछ जग अभी क्या क्या कहेगा, ,. मैं तुम्हारे रूप चिन्तन में 21 সুতার




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