आधुनिक राजनीतिक विचारों का इतिहास | Adhunik Rajneetik Vicharon Ka Itihas

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Adhunik Rajneetik Vicharon Ka Itihas by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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वकि = चिन्तन ल ` भ्न अत = कक बल पूनान এ ইক म्जनीतिक्त चिन्तन वं उतायं के प्र् यरय ठ प्राचाम्‌ यमान के ~ = ८ के राजनीतिक विचार की समीक्षा छी मर्य [~थ ग्रानम्म थे लबत ब्रक तक के राजनी तिक विचार की समीक्षा की गयी थी । শালিক ~~~ <~ -~ 5 बज अली, पृष्ठभूमि ~ नन ~ ~ = ~ ग्रनप प्रादनिक राजनीतिक विचारों का प्रष्ठभ्ाम का समझने के सदभ म यह अनुप- जात “4 र्‌ नीतिक विदान की दिवा = पवाज् मल (न এ ফিল (र ~> ~+ = ---~-- হালা লগ হাউ ~£: प्र दा छरस्त के राह नीतिक विचारों का ख्ावाराशला संग्र-र क्र त पर छू ही दिकी हुई है । रोमन साम्राज्य की स्थापना से नगर-राज्य की ह्वतन्बता छिल्न-मिन्न हो गई । नगर-राज्यों की दीवालें मिराकर महान रोमन साम्राज्य का स्वप्न साकार हुआ । स्टाइक्स के विचारों पर मूलतः इस नई स्थिति का प्रभाव पढ़ा ॥ तत्पण्चात्‌ इसाई का २ 3 ५ को लाकर. वतन तत्व का प्रवेश # = सन्प्ता म एक नूतन तत्व का प्रत्रश हुग्रा । शत्त: श सांन्राज्य का राजकीय घम वेन गया त नः ईसाई घर्म रमनं তিক দুলজানন্যা গীত লুগছাহ ध्रान्दोलन हुए तथा पश्चिमी यूरोप के क्षितिज पर राष्ट्र-याज्यों का उदय हुआ | इनके परिणामस्वरूप मध्यकालीन शूरोप का आबुनिकरण प्रारम्म हुआ तथा राजनीतिक विचारधारा में मी एक नया मोड आंध्य । राजनीतिक विच्ारक राष्ट्र राज्य की प्रकृति एवं स्वरूप का अध्ययन करने लगे । লালে टू राज्य का ऐसा स्वरूप सामने श्राया जो घमं निरयेश्न हीर के पुमत्ता सम्पन्न था । इस णताब्दी में राजनीतिक विचारक संबंध में हो विचार करते नहें । १७वीं जवाब्दी में मुल्यतया दो राजनीतिक विचारधारायें रही । एक शोर राजनीतिक विश्चारकों ने राज्य के तिरकुजवाद वा समर्थन क्रिया और दूसरी ओर नागरिकों की स्वतन्त्रता प्रदान करने के लिये টু कठोर प्रहार किया । एक झोर बोदां और ह्वाव्य मे निरंकुबबाद का समयन किया तो दूसरी ओर लॉक ने साँविद्यानिक राजतंत का समथन किया । ভলী स्वीगीण सम्पन्न लोकप्रिय सार्वभोमिकता का पक्ष लिया = पर्वा्गीणु सम्पन्न लोकप्रिय सावभौमिकता का पक्ष लिया। माप्टेस्क्यू ने भी ब्यक्तियत स्वतन्त्रता के पक्ष में दे देताच पज क्य । कुछ समय पश्चात्त फ्रांस मे




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