नवतत्व | Navtatv

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Navtatv by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१५ ( १६) प्रथम संहनन-'वजक्रपमनाराच- जिस, कर्मे मिले, उसे वज्ऋषभनाराचः नामकमे करते हैं| हड़्ियाकी स्वनाको ,संहनन कहते है।. ,, ) दो हाईका ` मकंट बन्ध होने पर एक पद्य (बेठन) दोनों पर रुपेट दिया जाय फिर तीनो पर खीरा टोका जाय इस तरहकी मजबूत 'हडयोकीः रच्नाको वजक्रपभनाराचः कहते हें । ( १७ ) प्रथम संखान-समचतुरस' जिस कमंसे भिरे उसे समचतुरस संसथान नासकमे कहते द । वि पलथी मारकर बेठनेसे दोनों जाडु ओर दोनों ऋन्‍धोंका ५ इसीतरह बायें जानु ओर दहिने कन्धेका तथा दक्षिण जानु ओर बामस्कन्धका अन्तर समान हो, तो उस संखानको समचतुरस् संखान कते रै । जिनेश्वर भगवान्‌ तथा देव- ताओंका यही संखान हे । ~ वण्ण चउका5गुरुलहु, परघा ऊसास आयवुनों । सुभं खगडइ निमिण तस दंस सुर नर तिरि आड तित्थयरं ॥.११ ॥ वरणंचतुष्क, (वणे, गन्ध; रस ओर स्पशे ) अगुरुलघु पुराघात, .धासोच्छास, आतप, उद्योते, शुभविहायोगति;




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