हिंदी विपूवकोष : भाग 21 | Hindi Vipuvakosh : Bhag 21

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Hindi Vipuvakosh : Bhag 21 by पंडित हीरालाल जैन - Pandit Heeralal Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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'बहन-वहिरद् वहन ( सं० की०) उद्यतेप्नेमेति वह-करणे व्युट । १ दोड़, तरेंदा, वेहा ।२ खींच कर अथवा सिर या कंधे पर छाद्‌ कर पक जगहसे दूसरी जगद्द के ज्ञाना। ३ ऊपर केना, उडाना । ` 8 कंधे या सिर पर केना! ५ खम्मेके नौ भागेपिंसे ससे नीवेक्ता भाग । ( ति० ) ६ चाह, दोनेवाला । | | १९५ २ असभ्य) २जो पाषतुन হী) জী आादुमिर्थोे रहना न ज्ञानता हो। ४ भड़कनेवाला । वदाँ ( हि० अव्य० ) उस जगद्द, उस स्थान पर। जैसे-- 'यहाँ' का प्रयोग पासके स्थानके लिये द्वोता है, गेसे हो इस शब्दका प्रयेगग दूरके स्थानके लिये द्वोता है । वहा ( स'० स्के० ) वहतीति चह-अच्‌ टापू । नदी । वहनभड़ ( स'० पु० ) १ टूटो हुई नाव 1 ९ वहननिद्॒त्ति। | चहावी (अ० पु०) सुसलूमानोंका एक सम्प्रदाय जो चदनीय ( स'० लि० ) |बह-भनोयर्‌ | १ उठा या खींच कर উজার योग्य ! २ ऊपर छने याग । चहन्त (स'० पु०) बहति वातीति बह ( मूबहिवसीति ! उय + ३११२८ ) इति ऋच्‌ । १ वायु ! उदाते इति कर्मणि ऋच्‌ 1 २ बालक । वहम ( मऽ पु° ) १ विना सं कर्पके चित्तका किसो वात ঘহ জালা, मिथ्या धारणा, कूटा खशल 1 २ भ्रप्त 1 ३ ` ्यथंको शंका, मिथ्या स देह, फजूल शक ! वहमी (अ० वि०) १ वृथा स देह द्वारा उत्पन्न, श्रम জন্য । २ बहम करनेवाला, जो मर्थं स देहम पड़े, किसी वात- के सगन्धे जो उथं भला बुरा सोचे } ३ शठे लयाल- में पड़ा रहनेवाला | बहल ( स० पु०) उह्यतेपनेनेति बहु वाहुलकात्‌ू अलच । १ नौका, नाव । (ल्ि०) २ दृढ़, मजबूत । वदलगन्ध (स'० क्ली०) वदलः प्रचुरों गन्घो यस्य | शम्बर चन्दन | वदलवक्षुख. ( स ० पु० ) वटानि प्रचुराणि चक्ष षव पुष्वाण्यस्य । मेपश्टक्गो, मेढ़ासींगी | वदरत्वच. ( से ० प° ) वहा हृढ़ात्वचा घल्कल॑ ত্য । श्वेत लोध्र, सफेद छोध। हका (स'° स्तो ०) वहानि प्रञुराणि पुष्पाणि सन्त्यस्य इति, अशे मादित्वादच । १ शतपुष्पा । २ स्थूरला, बड़ी इलायची । २ दीपक रागकी एक रागिनीक्षा नाम । चह॒शत ( अ० स्त्री० ) १ ज'गलीपन, असम्यता, वर्जरता । २ पागलपन, वावलापन। ३ उज्नइपन ! ४ विऋलता, भवरादर। ५ डरावनापन। ६ चित्तकरो অতল, अघीरता | ७ चहल पहल या रौनक न होना, सज्नाटापन, उदासी | बहशो (अ० त्रि १ ज्ञंगलमें रहनेवाला, ज्ञगलो। अब्दुल चद्ाव नजदीका चलाया हुआ है। अब्दुल वद्दाव अरवके तज्ञ द नामक स्थान्मे पैदा हुआ था। वह मुदभाद सादवके स््बोचपदको अखोकार करवा था । इस मतके यलुयायो किसी व्यक्ति या स्थानविशेषक्त प्रतिष्ठा नद्दीं करते। अब्दुल वक्षावने अनेक मसज़िदों ओर पवित्र स्थानोंकों तोड़फोड़ डाला और मुदृस्मद साइवकी कन्न- फो भी खाद कर फेक देना चाहां था। इस मतके अनु- यायी अरब और फारसमें अधिक हैं। चहि; ( स० अधष्य० ) ज्ञों अंदर न हो, वाहर। हिन्दीमें इस शब्दका प्रयोग भफेले नहीं दोता, समस्तरुपमें दोता है। जैसे-बहिगेत, बहिष्कार, बहिरज्ः इत्यादि | वदिः्कुटीचर ( स पु० ) बहिः कुख्यां चरतोति चर-द । कुलीर, के कड़ा | वहिश्शोत ( स'० पु० ) वाहरकां शोतरूता | चद्विशक्षी (स'० अव्य० ) १ वाह्मतः । २ बहिरसिमुखत । वहिःस'स्थ ( स'*० ति० ) वाहरमें अवस्थित । वह्धिस्थ (स'° लि° ) वदहिरस्थ, बाषटरफी ओर । वहित ( सऽ ि० ) अवदोयतेऽख्येति अव -धान्त, अव. स्यति लोपः १ अवस्थित। २ ख्यात, प्रसिद्ध | ३ प्राप्त। ४ कृतचहन । মহিন (ল'ও সী) নহুনি द्रव्याणीति वह ( अशितादिस्य इन्नोत्री | उण_81१७२। इति इतर । नौका, नाव । चहितक ( स० क्लो० ) चहित खा्थे कन्‌। जरूबान, नाव, जहाज | चह्ितिमडु ( स'० पु० ) हुटो हुई नाथ । वहिन्‌ ( स'० ति० ) घहनशीछ । चहिनो ( स'० ख्रो० ) नौका, नाव। वहिस्ड्र ( स० पु० ) १ शरोरका वाहरीभाग, देहका वाहरी हिस्सा । २ दग्यती 1 ३ जागन्तुक व्यक्ति, कहीं बाहर-




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