जार्ज वाशिंगटन [व्यक्ति और स्मारक] | Jarj Washington [Vyakti Aur Smarak]

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Jarj Washington [Vyakti Aur Smarak] by हरिशचन्द्र - Harishchandra
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
14 MB
कुल पृष्ठ :
269
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हेहोते हुए भी उसकी विचारधारा विक्टोरिया कालीन थी। वह सर्वप्रथम व्यक्ति था जिसने वाशिंगटन को उन्नीसवी शताब्दी के आदर्शो के अनुरूप प्रस्तुत किया । सन्‌ १८०० मे बीस्‍्स ने अपने प्रकाशक को बिस्तार से बताया कि वाशिगटन महोदय की जीवनी लिखने का उसका क्या प्रयोजन है । अपने पत्र में उसने लिखा है कि उसका उद्देश्य उस महापुरुष के “इन महान्‌ गुणो को (ससार के सामने) लाना है - १- उनकी ईश्वर के प्रति श्रद्धा, अथवा उनके धामिक सिद्धान्त, २- उनकी देश भक्ति, ३ - उनकी उदारता, ४- उनका अध्यवसाय, ५-उन की मदिरादि से अरुचि तथा धीर. गम्भीर स्वभाव, ६~ उनकी न्याय-प्रियता, इत्यादि ।' सक्षेपमे यह पाठय-पुस्तको के नायक के गुणों की रूपरेखा है ।यद्यपि बीम्स स्वय इतने उदात्त विचारो का नही था जितना कि उसके इस कथन से प्रकट होता है, तथापि इसमे सन्देह नही कि वाशिगटन के लिये उसके हृदय मे उतना ही आदर भौर भक्ति थी जितनी कि किसी भी अमरीकी को उनके लिये हौ सकती है । बीम्स ने उस प्रकाशक से यह बात भी कही किं इस तजवीज से उन्हे रुपया गौर लोकप्रियता दोनो प्राप्त हो सक्ते है । अत वह घटनाओं को गढने से नही चूका । न ही उसने अपने आप को मार वैन के अस्तिप्वहीन गिरजाघर का पादरी' कहलाने से सकोच किया । उसकी इस छोटी सी पुस्तिका ने कपोल-कल्पित कहानियो के समावेश के कारण धीरे-धीरे एकं ग्रन्थ का आकार धारण कर लिया । उदाहरणार्थ उसने एक कहानी वाशिगटन के चेरी के पेड काटने के बारे मे लिखी, जिसमे वाशिगटन के मुख से कहलाया गया - 'पिता जी, मै झूठ नही बोल सकता । मैंने ही इस पेड को अपनी कुल्हाड़ी से काटा था ।' इस पर वाशिगटन के पिता आनन्द-विभोर हो कर बोले - भेरे वेटे । मेरी आंखो के तारे | मेरी गोदी मे आ जाओ । एक आर कहानी मे दिखायागया है कि वाशिगटन अपने विद्यालय के छाल्नो को परस्पर लडने के कारण झिडक रहे है ।




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