अग्नि - दीक्षा | Agni Diksha

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Agni Diksha by अमृत राय - Amrit Rai

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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४ इन गया हैं। दूसरे रांविण्त लेखकों की तरद्द निकालाई ऑस्व्रांवस्की भी गांकी- की परम्परा का लंखक था। लेकिन इसका यह' मतलब नहीं कि वह कवल अनुसरण करवा था। ऑस्टॉकस्की ने नई बातों का आश्प्कार भी किया और एक नय॑ शाहि- ल्थिक नायक की सृष्टि की।आमैवाली अनेक पीडियो' हक पायेल कोर्चागिन नपयुवकां दा आदर्श रहेगा! हर पीढ़ी पिर पटी सं ज्यादा बडी सद्या मैः कोर्वाणिन की धातु, कं नवयुवकां को जन्म देती है । उसके महान शिक्षक मक्सिम गारक म जं अन्तर्दष्टि थी, यरी ही अन्तदटष्टि याषस्की मं भी ছিতোহ যী है जिसय टर उरनं अण्नं काल की वास्तविकता में से आगे आनेवाले सत्य को पहचान शिवा । पावेल कोर्चागन की पीरतापूर्ण विशेष्ताए सोवियत नवयुवकां में अधिकाधिक मिलती हैं। पिछली साई ने इस बात को दिखलाया कि ऐसे ही गुण लाटां-क्रोडो सांग्यित जनता में भी पायं जाते हः! आज कं रोज यदत से विशाल कारठछान्ग मे सबसे अच्छो काम करनेदाले गॉयवान मजदूर की टोलियां ने अपन॑ शाम निकोलाई ऑस्व्रांवस्की आर उनके नायक पावेद्र कोर्चागिन' फे नाम पर' रखे हैं।निकोलाई ऑस्प्रोवस्की एक सांहेश्य कलाकार था जा उ्छी तरह इस दात कौ जानता था कि उसे क्या करना है। वह जानता था कि उसे एफ एंसे युवा सौनिल के विस की सूष्टि करनी है, जिसले उदाहरण णर देश के नयधुवक छले। इस काम को पूरा करने के दिए ण्ह जरूरी था कि उसकी पुस्तक कसी एक एामान्य व्यक्ति का जीयः, चरन हो, जां वह दिला सके कि कोई भी नायुरुक उरू रास्त॑ ण? शाम दढ सक्ता है । मगर उसके साथ ही साथ यह भी उररी था कि बह एक वीरतापूर्ण बीवन-चरित हो, क्योकि ऑस्टाॉकस्की प्रोतिनीदन के जीवन में देश की लमन्य मेटनठकश जनता कौ शिरा प्रकार स्ष करते देखता था, उसमे उसको एक गर्ग रोमानी गुण मिलता था यरे एंसी दत सी गत मिलती थीं यो कि अनुक्शणीय वीं आर यही वह भावना धी जिसे उसने उपने मुख्य नायक ओ दूसरे पायं व अन्दर डाली । कहानी कौ तफसीती वाचा को उसने ऊण्ने और अपने साथियाँ क॑ तजुर्या से लिया और उन्हे 'चित्रित श्चा । यह ध्यान नै ली वात हैं कि उसने जिन्दगी क॑ हू सं गहानुरी कं कारनामा कं दारे म सिर्फा इसलिए नहीं लिखा कि उसको डर था कि उनकी गरे म {नतं समय वह वात को वदा-्वद्या दैगा। उसने कहीं भी इस बात ঘন उल्ले नही शिया कि एक चार जद वह अभी छोटा स लडका रौ ण तेव उसने गुण ক্গালিদাশী कॉमिटी ऊ दहत से इश्तिहार एक जर्मन सन्तसै के टीक नाक জী নাল ঘন वविएकाये धन इम यन्मा को कि जय वह पद्रहे माल का डोकत ही था तभी तनेनावांआदवॉलिन्स्की के पास एक पुल को वाल्ड से उड़ा दिया था আঁক নবীभर १७




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