हिंदी तद्वव-शास्त्र | Hindi Tadvv Shastra

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Hindi Tadvv Shastra by मुरलीधर श्रीवास्तव - Murlidhar Shrivastav

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दिया, अनेक देशों के सम्पक, आदान-प्रदान से आ्रार्यावतत' का सामाजिक আনন ब्ध और उद्बेलित हो गया। यज्ञप्रधान वैदिक धर्म और उसके ब्रह्मवाद को भी नये प्रवतारवादो भक्तिप्रधानं भागवत ध्म का रूप लेना पड. * .. श्री कृष्ण का भगवान के रूप में स्वोकार वैदिक देवराज इन्द्र की अ्वर्भानता और ` शरणागतिमूलक भक्तिप्रधान उपासना मार्ग का उदय उस नये परिवत्त'न का ` संकेत कर रहै थे। श्री कृष्ण इस नवीन जीगरण या धार्मिक क्रान्ति के उद- . घोषक और तायक थे प्रौर कृष्ण द्वौपायन व्यास--इसके विचार-प्रचारक और _व्याख्याता। भागवत धर्म के उदय के बाद व्यास को पुराणों को भी नवरूप- देना पड़ा । ¦ | भाषा के विकास की दृष्टि से वैदिक भाषा का जो रूप श्राज प्रा है. . बहुत पुराना है । कितना पुराना है यह जानना कठिन है । जबतक वेदो ` का रचनाकाल निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता तबतक भाषा का आरम्भकाल भी बताता कठिन है। जब भी वेदों की रचनो हुईं, उससे लगभग एक सरहल वष पव से तौ अ्रवश्य ही वह भाषा समुद्ध अवस्था में रही होगी + . वेदभाषा जिस व्यवस्थित, विकास और पृष्ट भाषा के रूप में मिलती है, उसे देखकर उसका प्रारम्भ वहत पहुल हुआ होगा, इसमे सन्देह नहीं रह जा ` सकता । 'जस प्रकार का उच्च ज्ञान. प्रकृति के तत्त्वों का, ज्योतिष का, ज्ञान- विज्ञान की प्राय: सभी मे त्वपूण शाखाग्रों का वेदों में उपलब्ध है, उसे देखकर ` यह अनुमान किया जा सकता है कि जब भी वेदमंत्रों को रचना हुई उससे कम से ` कम एकं सेल वष पुवं भी संस्कृत भाषा का अस्तित्व रहा होगा वेदिक भाषा में अ्रनेक विद्वान्‌ कुछ शब्दों को विदेशी भाषा के शब्द बताते क्‍ .. हैं, क्योंकि ये यूरोप के किसी भाग की बाद की प्राचीन भाषा में भी किचित्‌ ` विक्ृत या परिवत्तित रूप में मिलते हैं । संसार में ऐसो कोई श्रार्य॑माषा नही ` | है जो वेदभाषा की समकालीन हो, फिर चाहे कोई शब्द लितुआनिया, ` आस्ट्रिया, बैबिलोनिया या मिसर के किसी प्राचीन शब्द के निकट दिखाई पड़ता... है, तो हम उन शब्दों को वेद में प्रयुक्त विदेशी शब्द क्यों मान ले } श्रादान श्रौर . | प्रदान दोनों में जब समान है, तब प्राचीन भाषा से बाद की भाषा मे शब्द का ` |. जाना ही अधिक मान्य है) श्रतः कोई शब्द संस्कृत में विदेश से आया ইরা . ` | विदेश में संस्कृत से गया है, इसका निर्णाय तो हैमी हो सकता है जवर श्रादाता. ` ५) और भ्रदाता दोनों भाषाश्रों का काल सुनिश्चित हो । श्रतु; वेदो में प्रयुक शब्दों: : ~ ` ` । . में कौन अनाँय मल के हैं और कौन नहीं, यह बहुत विचार-विवेक के -बादः- | कर




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