चडता सूरज | Chadhta Suraj
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
84
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)एक्खाच क श्त
कायरता की बात न सोचो हिम्मत से लो काम।
काम . सफल कर देगा सारे अहा ईश्वर राम ॥
तुम चाहो तो धरती उगते हीरे के अम्बार । 8
तमं चाहो तो पत्थर से भी निकले अम्नत धार ॥ |
तुम चाहो तो हल बक्खर से पर्दत को सरकाओ । ~
| तुम चाहो तो घास फूस में केसर रंग रचाओ ॥
রর तुम चाहो तो ने जंगल फूलों से भर আর্থ।
রর ४, # तुम चाहो तो दुख के जहरी नाग. सबही मर जार्य॥
ॐ तुम चाहो तो नदी नालो के मह फिर-फिर जयं ।
ध तुम चाहो तो महनत के बादल अमृत बरसायं ॥
तुम चाहो तो हर गांव बन जाये स्वग समान,
सुथराई में काट के रख दो बड़े बड़ों के कान ||
सुन्दरता की मूरत बनजाय हर एक मकान ।
द लिपी पुती दीवारें घर की सजा हुआ सामान ॥
घर घर चेन की बंसी बाजे खेत खड़े लहलायें।
लहक उठे मेहनत की बगिया भूम उठें आशाये ॥ॐ { ‰ $ 2 ॐ | জন তু > मे ९२ ধু ৮
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स~ ~ 4हम चाहो तो गांव तुम्हारे शरं को शरमाये।देखने वाले देख देख कर हैरत में रह जायें ॥
तुम भारत- के रखवाले हो तुम भारत की शान ।
देश की सुन्दरता है तुमसे तुम मज़दर किसान ॥५द & >» ४ $ है कईहा कक ॐ इ ক
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