आदर्श - मुनि | Adarsh-muni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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'सब काठ धार्मिक विचार और उपदकज्ों ही मे लगता हे | ये कमी कोरी सांसारिक वातो मे कालक्षेप नहं करते । इनकी , तपत्या मी वदी कठिन ह यौर इन का आस-लाय सरवेया सराहनीय है । जैनसाधुओं के कैसे कठिन नियम हैं और उन कौ दिनचर्यां किस परश्चर की है ? इसका पूरा वर्णेन इस पुस्तक . के ₹१७-२ १० पुष्ठों में दिया है । सारांश यह है कि जिस ` मूल-यतब को हम पहिले कह आए हैं उत्की আদায় ঘাতদ करने में जैनसाघु मरसक चेष्टा करते हैं | उनका जीवन नितांत पवित्र, उद्याग्य, परोपकारनिष्ट एवं त्याग संयुक्त होता है।ऐसे ही एक प्रयत्यागी, चचरित्र, परोएकारी साथ का जीवनचरित्र इस पुस्तक में दिया हैं। आप का पविन्न नाम, श्रौयमठ जी दै । आपका जग्म सं० 2९२४ के कार्तिक मात में नीमच नगर में हुआ या | आपने ?५ वर्ष तक विवा पदी सं० ?९५० में जाप का विवाह हुआ । उसी बर्ष आपके पिता जी की मृत्यु हुई और सं० १९५२ में आपने अपनी নি माता की सम्मत्ति से मुनि होराठाल जी से दीक्षा छी | इस » समय आपकी आयु ४८ यंशं | इन साधु जी महाराज ५ हे आयेरे और घोहपुर में स॒झ्े मी मिलसे का सौसाग्य आप्त . हुआ 1 मापते करै स्वास्थोन भी मैने सुने हैं में कह संकेता * हूं कि आपकी भपिण शक्ति बढ़ी प्रयोवश्राडिगी हैं । आएफी




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