सरल गुरुग्रन्थ साहिब एवं सिख धर्म | Saral Guru Granth Saahib Avam Sikh Dharm
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
49 MB
कुल पष्ठ :
296
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)और जो सिख प्रभु को मिलना चाहे वह गुरु ग्रंथ साहिब ' के शबद (पवित्र वाणी) में प्रभु की खोज
कर ले।गुरुद्धारा
शाब्दिक रूप से गुरुद्वारा का अर्थ है-गुरु का द्वार अथवा गुरु का घर् । गुरुवाणी का पवित्र
कथन है-' जित्थे जाए बहे मेरा सतिगुरु यु थान सुहावा अर्थात् वह हर स्थान पवित्र है जहां
गुरु के चरण पड़े | सिख गुरुओं का जिस स्थान पर जन्म हुआ, अपने जीवन काल में महान् गुरु
जहाँ-जहाँ गए और संगत को उपदेश दिया, गुरुओं ने जहाँ-जहाँ किसीका उद्धार किया, जहाँ-
जहाँ गुरुओं ने अपने जीवन का अंतिम समय बिताया और जहाँ-जहाँ वे स्वर्ग सिधारे वे सभी स्थान
गुरुओं की याद से जुड़कर पवित्र और सिखों के लिए पूज्य हो गए। पर उस समय ऐसे सभी स्थानों
“गुरुद्वारा ' नहीं, ' धर्मशाला ' कहा जाता था। इसी प्रकार गुरु नानकदेव के समय में धर्म के प्रचार
के लिए जो केंद्र स्थापित किए गए, वे केंद्र भी धर्मशाला कहलाए। गुरु गोबिंद सिंह द्वारा सन्
१७०८ में गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु की पदवी देने के बाद जिस किसी स्थान पर भी इस पवित्र ग्रंथ
का प्रकाश (स्थापना) हुआ, वह स्थान गुरुद्वारा हो गया।
आज गुरुद्वारा से तात्पर्य सिखों के उस धार्मिक केंद्र से है जहाँ 'गुरु ग्रंथ साहिब ' का प्रकाशকও বােশা রে চারা४९,
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