अपना पराया | Apna Paraya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अपना-पराया ७.दीनू--मगर, अभी भिरजा साव के घर से सीक्र-कवाव दे गया है कोई ।रानी--अच्छा ! आज ज़माने पर कैसे याद आह मै“ मगर तुम्हें तो जता देना था कि में अब*******दीनू--( हँसकर ) भगविन हो गई !र न्‍नी--नहीं-नहीं, यह कह ने की नहीं ০৪৬ ৩৬৩ तुम छोड़ो भी ००००० ० अपने एक खत के साथ वापस कर दृगी।युसुफ-- ( सामने आकर ) में तो हाथ बाँधे खड़ा ही हूँ--साथ लिये जाऊं गा, कोई भुजायका न्ह |रानी--अरे ! अभी तुम गये नहीं !युसुफ--जी, जा ही रहा हँ--मेरा तो कोई काम नहीं अब | में तो तुम्हारी आँखों के आँसू पर खिंच आया था,नहीं तो 0००० ककरानी--( आँखें उठाकर ) ऐसा क्‍यों कह रहे हो, मेंने तो कुछ कहा नहीं ।युसुफ--जी नहीं, बात यह है कि आपका चेहरा खिल उठा-- खुशी की लर है । मैने देख लिया-लाखों पाया । अब मेरी वैसी जरूरत न रही। ` ` |रानी--भला यह भी कोई बात है ९युसुफ--बन्दा परवर, यों आने के लिए तो आपके दर पर दुनियाँ आती हे। हँसी पी के साथी तो बे-वुलाये भी आसमान से बरस आते हैं बराबर, मगर कहीं, खुदा न करे, आसमान सर पर फटा ओर उमड़ आये तुम्हारी आँखों में आँसू तो फिर आये तो कोई उन्हें अपनी आँखों में पिरोने'**“*“*“'जाने दीजिये, आप फूलें-फलें ।रानी--अच्छा भई, फिर कभी ++ उठ खड़ी होती है )युसुफ--जी, जेसी मजी “खुदा हाफिज । ( युसुफ दूसरी ओर मुड़ता है। एक अजब आवेश में लगता है गुनगुनाने भी )“वो फिर वाद्‌। मिलने को करते हँ यानी, ( अभी कुछ दिनों ओर जीवा पड़ेगा |” )




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