विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका | Vigyan Parishad Anusandhan Patrika

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हैकेल परिवतं सम्बन्धी एक प्रमेय 15 यदि #(०+७+>) >[2(७)|,, 2(9)>0, #>0, तथा उपर्यक्त में निहित समाकल पणरूप ण अभिसारी हो । समाकलन के क्रम परिवतन को सहज ही वेध माता जा सकता है क्‍योंकि (1-3) तथा (1-4) हैंकेल परिवर्तों की विद्यमानता के कारण परम अभिसारी हैं। सम्प्रयोग [1, 9. 81(3)] पर विचार करने पर (4) =+ (55771 রঃ 65227 +-1; +-& ) हमें निम्नांकित फल प्राप्त होगा : ८ ^) ১০০০ “(৬ 227 7 ध 4 न (2) न- শিক ८५५) 2০-15-27৮7] 0 1-५-०५ (ह) 7 ০/০-০1৮4+% 7 9 197 ~~ 17 (८ १ नि 1“ (६ 2 र == (0); -- 1 < २(५) २५८५ 4 छ १ 1.५ ) |! क » নি )] “० 93 480০) ৯০. 2০-1৮-8177 471] 1८८1412 £০- ¢6(6८) ¢ (1) = _াঁঁাাশাটিটিটাঁুলুলাীটিী ১4 ( 1, (6 श्रव 0 (8 ) ८७४) पि (८ -- ~ লিলি 77459 রর /-71-4ু ) 0005 ) # 2०८ 1५11 [7012 1110-1 7140112 (५) (त 1০ ০৮-০/3 91444] 2078734৮0৮7 (42 - 1 )५/2+1/4 हो না 02 ~- 42/22 -]- 1 हां 1८८ 2৪ रे क ) > 0; २(6) > 0; ^ (॥८-1- 0) > -- 1, ९) >- 1 [1, 0. 67, 50] == (#) प्रमेय का सम्प्रयोग करने पर 2४1 [ /०-{- (८-1-४0 977752৮7525 জারির __ |, 07? 0 ( 2 ১ (০415 ৮1157 82 % 82) जा कल न ;) ৮47] )/




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