संस्कारविधिः | Sanskarvidhi

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Sanskarvidhi by Dayananda Saraswati

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हर ये युति यारा मनोयज॑त्रा ऋतशाः जेखि| यूथ पति स्व॒स्तिथिः सर्दा नः डा ज्ू० मं० ७ 1 सूभ ३५ | स० | धर चर १ माता मर्व॑मत्पिन्वते पयः पीयूप यौरदितिरद्रिंव्ट 1 चुपभरान्त्स्व'न॑खस्तो! अं दित्योँ झडुमदा स्ट ९ ॥ चूचक्षसों अनिसिपन्तों ऑईण चुहदेवासों असम । ज्याती स्‍्था अधिमाया नांगसो दियों व पते स्व॒स्तयें ॥१०। ये सुबु्चों यकज्ञमायुयुरपरिहूता द्िरे'दिवि चयम्‌। ता झा नमसा सुवक्तिभिमेंदो अदिति स्वस्तये ॥ ११ ॥ को वः र्तॉम, राधति य॑ जजपथ विंशवें देवासो यति छन ! कोवों ध्वर तुंबिजाता सारे करचो नः स्व॒स्तयें ॥ ९२९१ ये भय हो प्रथ , । त आदित्या अभय शर्म यच्छत खुगा न कत्ते सुपया स्वरतये ॥ १३) य शिर सुरवनस्थ मजेतखों (िमवेर मन्तंवः । “मे: कुतादरंतादेनससपय्या <वात पिपुता स्व॒स्तयें ॥ १४ 1! अरेस्विन्द खुद दवामदेदोसु्च खुरुत जन॑मू। अर्मि भुसच चर्ण सातय मम द्यावापृथ्ठिवी सर्तः स्व॒स्तयें || रण पी :खुचामाय पण्थिनी चा्मनेहसे सशमीयमदिात खुप्रसीतिम्‌ 1 देवी शवश्वामनागसमसवन्तीमा स्व॒स्तये ॥ १६ ॥ विश्व यजचा अर्थि जाय घ्व नी दुरवाया अभिहुते: । सत्य सो देवटटत्या इबेम शुरवतों दबा अचंसे स्व॒स्तये॥१७) « 'पामीवामप विश्वामनाड | झ्ारे देवी देखो सर शर्म यच्छुता स्वस्तये ॥ १८ | विश्व एच झ्॒ यते । दु्यमांदित्याह्नो नयंथा सुननीतिशिरति विश्वान दरिता स्व॒स्तय रत




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