मोत्यां मूंधो औसर | Motyan Moongho Aosar

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Book Image : मोत्यां मूंधो औसर - Motyan Moongho Aosar
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हौसतो जीत्या करे 15[र बो काकरी उठा'र उण पे फंकी । इत्ता मे वटाखट क्रतो हुयो ओक भवान उण र सान मार ऊमौ हयो अर बोत्यौ, “ঘলাম আনুন भाई 1“मालेक्म सलाम | कीवर आवणो हुयो ? अब ? ईं टैम रा २7“आपने कमाडिग-अफसर सांब याद फुरमाव ! अवे | ई ज घड़ी ! पधारो 1“कागद उः ई मेत्यो, वी वै भां रो वोज्ञ धरर ब्दीर हुई गियो ।घायरलेस पै वैठधोडो अफ्सर माथी उठा'र थोडी जेज उण रो उणि- यारो देख'र बोल्यो--रिसालदार अयूब | ठेम आ पूर्गी। सम्भलणे रो ओऔसर भी अवै को है नी। समाचार है'व, पाक रा पैठनटैका 'रो दछ आपा रे नजीक आ पूगो है ।”आय्या मे अणूती चिक पढटकी | भुजावा फठकी | मनचीत्यो हुयो।“ साव । अल्ला-ताला जेज सू सुणी, पण सुणी जरूर! हुकम हुवे तो पैटनटेका सू धकरा'र देखू । जलमभोम पै मर मिटर्ण रो ओ मूषामोलो क्षैसर आयो ए!“अयूव ! थार पे मन्‍्नें पूरो विस्वास है। अब आप री सूझबूझ मू, ट्टा जवान लैर देस रे नमक रो करज उतारो 1/* फौजी संग टाछवा ई ण हुवे । हुकुम री जेज है ।”“कूच करी | थारी मदत, आर्भ सू नेट नर हटर जहाज बरैता। पाछ सू पैदल सेना भी पूग जासी ।”/“दैटनटैका रो विणास कर दूला, जूना चेडा उजाड दूला ।”दे पै मर मिटणे रा कोड मूछाछा री टुकडी दुसमणां ₹ समन्दर रो बिलो-वणो बरण नै घ॒र्क बधी ।आमै-सामे होवण म जेज को लागी नी । दुसमण रा पैटनटेवा सू गोछा री बिरखा होवण लागी। गोवा छूट॑, जमी फाड'र धस, धुवा अर धूड रा बादक्क उठे 1हवलदार अब्दुल हमीद जबावी ग्रोद्या दागण ने उतावछो हयो पण अयूब बरज'र कैयो, “जोस म होस नी खोवणों । छानामाना बचता हुया बढ़ता रैवण मे ई ज सर है। नजीक पचर चीते रे ज्यू मटादूट हमलो बरस्था। यू भेक भी गोछो खाली नी जावेला | मरणो तो है ही, पण,




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