हिंदुस्तानी ( हिंदुस्तानी एकेडेमी की तिमाही पत्रिका ) | Hindustani (Hindustani Academy Ki Timahi Patrika )

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Hindustani (Hindustani Academy Ki Timahi Patrika ) by सत्य जीवन वर्मा - Satya Jeevan Verma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(० 1हदुस्तानी अमिपक के विधान का भी उख सविस्तर मिस्ताहै इन शीषकोसे मानसार की सवगपरणेता का अच्छा आभाप्त मिल्ता है, परस्तु सक्षेष मे ठसक वस्य कैं वितयमं बरोडा और प्रकाश डालना युक्तिसंमत होगा। उस महातिश्ववर्भा (ईइबर) थे ब्रद्मांछ की रखता फी । इस के चार सुखदे । पूर्व मुख का तान जिश्वस्‌, दक्षिण का विश्वविड, परचम का विश्व-सुप्ठा और उलर बा ক पि्बस्थ है। इच्छीं मारो से विश्वकर्मा (कारीगर, वास्तुकार ) गा पी उत्पत्ति हुई। पूर्त मुख से विश्वकर्मा, वक्षिण से सय, उत्तर से त्वष्टा और पश्चिम से भनु उत्पन्न हुए। विव्तवर्मा से इंद्र की पूभ्री से विधाह किया, मय ने सुश्द्र-तनगा से, त्वप्टा ने वैश्ववण-सुता से, और मनु ने नछकत्गा से विवाह किया । विश्वकर्मा से रधापति उत्पन्न हू, मय से सूवग्रह, त्वप्टा से वर्धकी और मन से तक्षक उत्पन्न हुए । स्थापति सर्व-प्रवान है। ये सर्वशास्न्नों के जाता होते है इन के अधीनं नेप तीनो, कार्य-सपादन करते है । वास्तुकला-सबधी समस्त ज्ञान इन्हे रहता है, और इच' की निग- रानी में वास्तु-निर्माण होता हैं। सूत्रअनरह का काम नापना-जौखमना ओर मानचित्र बनाना हैं। इस के अधीन वधेकी ओर्‌ तक्षक कराम करते ह वर्घकी का धर्म चित्रकर्म (रग भरना, बेल-बूरे व्रनाना} ओर तक्षक का काम काटनां जौडना आदि है। उन चारो क परस्पर सहयोन खैर मसूरो की सहायता से कामः होता ह । मुनियों की आँखों से जो दिखाईंपडे उसे परमाणु कहते हूँ। भानसार' में भाप परमाणु से आरभ होता ছু । सक्षेप्र मं बह इस प्रकार है । अष ८ परमाणु पशाबर १ रथधूरि ८ गथधूलि ,, ४ बालछाग्र (बाल की नोक) ८वाकाग्र ,, * लिक्ष (छीख) ८ लक्ष „+ १ यूक्र (जुूँ) ८ यूक „ £ সু (जौ) ८ पव ,„ १ अगरु (मोटाई)




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