आत्मानंद प्रकाश | Aatmanand Prakash

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१५ द्रो--र्चि० ॥१॥ प्रु चण जगतां स्वासीरे-चट घटना अंतर आसीरे जग पुरिखादासा सुनानी- चि० ॥:२.॥ प्रकुनासथकी निस्ताररे- भावे पामे भवनो पाररे-- मिरे जनम सरण संसार--चे० ॥३॥ काम कुंभ घेलुमाभि रायारे-खुर इश्च समाजग गायारे-- पिण फलमां अधिकछे दाया-जिं० ॥थ॥। ঘলী অজ বাহ লাই সন पास पासते कापेरे- অর जुक्ति पुरीसमा धापे--वि० ॥5५॥ सन वच्‌ कांधाः भवि पूनोर-दुनियासा देव न - दृजोरे-नासे राज देष मन रूनो--र्चे० ॥ 8 ॥ बडोदा पपरा. सेस पायारे-द्शन आतम रंग छायारें-करो चकछम हे सवाया-चि० ॥७ _. -০হলি০-- श्री क्रशरायानाथ ऋषभसदव जन रतवनम् ( चाल नाटक ) “ « प्रसिद्ध प्रताप जगतसें घणो-धयों नाथ केद . . रीथाजी तणो। सुरा सुरनर पाति गुणने. गणो-नहीं `




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