रामगीता सटीक | Ramgeeta Sateek

Ramgeeta Sateek by जालिम सिंह - Zalim Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गामगीता सटीक । धू गौव को नित्य दान करतेथें, एक दिन उन्होंने एक ह्मण को वहुंत गौशें का दान दिया, उन सब को वह जब अपने घर मे लेगया,तव उनमे से एक गो भागकर राजा के घर आकर अर गौव में मिलगई, दूसरे दिन न जानकर राजाने ओर गवां के साथःउस गो को दूसरे ब्राह्मण के प्रति दान करदियाःवह जव लेगया,तव पहलेवाले ब्राह्मणने उस गो को पहचान कर कटाह मेरी है, दूसरे ने कहा,मेरे को राजा ने इस गौका दान दिया है, दोनों झगड़ते हुये राजा के पास आवे,राजाने कहा,हे बराह्मण|इस एक गौके बदले मेरे से छाख गी ओर छेले,इसको छोड़ दे, दोनों में से किसी ने भी न माना,और कोते राजा को शाप देदिया, जा तू गिरगिट योनि को प्राप्त हो;राजा गिर- गिट होगया ॥ २॥ मूलम्‌ ॥ कदाचिदेकान्तयुपस्थित प्रथ राम॑ रमालालितपादपंकजम ॥ सौमित्रिरापादितशुटमवनः प्रणम्यमत्तयादिनयानितोऽत्रषीत्‌




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