हमारे गांवोंका पुनर्निर्माण | Humare Gaanvka Punarnirmaan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्राप-तफाई श्र भाराम भौर गय॑के साथ हाथमें के सें जैसे कि कम और पेंसिझको एते है. हो इस कार्ममें खर्चका कोई समाछ ही रही छठेगा। बगर किसी खर्चकी जहूरत पड़ेगी मी तो बह केवछ झाजझू फाबड़ा टोकरौ कुद्दाती भौर छाय दष्ट बीटापु-तारूक दबराइया शरीदने तक ही सौमित रहेषा। सृद्यौ पल घम उतनी ही अच्छी कीटाजु-ताध्क दगा है जितनी कि कोई रसायतप्ास्त्ी बे सकता है। छेकित यहा तो उदार रपायगण्यास्त्री हमको पाह दतछापयें कि पावके छिए सबसे सस्ती जौर कारगर कीटाबु-ताघक चीज कौनसौ ह जिसे मांगा स्वय अपने पामे बना पके ई। हरिजनसेषक १५-२- १५ आरके गदे पंजाबक़े प्राम-सुभार संबंधी सरकारी महकमेके कमिश्तर पी तरेत हाए ल्लादके गइडके बारेमें प्रकाश्नित पत्रिकाके कुछ महत्वके अंश उद्धृत करके साथीजीते किया इसमें जो छुछ किक्ता है उसका समर्भत कोई मौ कर धक्ता है। मो प्लेनने चैते गश्इकि छिए लिद्धा ছু জকি জাল তত অহ छिफारिए कौ जाती है पह मैं चागता हूं। मगर मैरी राममें श्री पूजरेने जो एक फुटके किछसे बड्डोंदी सिफारिध्न की है बह कऋषिक बेहमिक एवं छामप्रद है। उसमें रुदाईशी मअधूरी कम होती है बौर पाद तिकाछनेकी मजपूरी या तो दिरूशुरू ही रहीं होती या बहुत बोड़ी होती है। फिए उस मैप्तेका खाद भी शगमय पक सप्ताम हौ बन्‌ जाता है। क्योंकि लमीनकी सतहुप्त ६-७ इंच तककौ गद्राईमें रहतेबाले जम्तुओ हवा और भूर्वकी किरणो ख पर অন্ত होठा है, जिससे सहइरे परड्डेमें दबाये जानेश्राफ़े मैलके बगित्यत कड्टी अफ्छा शाद तैयार हो जाता है। हेदि मैला ठिफ्ाने कगानेके सरीके कितने ही तरहके बयों न हो पाद रखनेकौ सुक्य बाए यह है कि सद मैसेको दश्दामे बाड़ा जरूर जाग। इससे शह शाम होता है -- एक तो प्रामदासौ हत्युरुस्त रहते हैँ दृतरे बड्रॉमे इव कर बला हमा रूाइ लेतोमें झाकूतेसे फालकी बृद्धि होती है और उसी आबिक स्थिति सुघरठी है। यह पाद रखता चाहये हि मैंतेटे बसादा




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