संयुक्त सूर्योदय जैन तिमिर नासक | Samyukta Suryodaya Jain Timir Nasak

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Book Image : संयुक्त सूर्योदय जैन तिमिर नासक  - Samyukta Suryodaya Jain Timir Nasak

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१६ चिन्त्य; असंख्य; आयं अर्थात्‌ सव से प्रथः म जहांतक बुद्धि पहुंचावें तुम्हें पहिले -ढी ' पावें अर्थात्‌ अनादि; ब्रह्मा ईश्वर अथातः क्वान आदि ऐश्वर्यय का धारक, सब से श्रेष्ठ अर्थात्‌ सब से जच्च पदवाला; अनन्तम्‌ जि- 'सका अन्त नहीं; अनंगकेतु-कामदेव-विका- रबुछ्धिके प्रकाश रुपी सूर्य्य को ढकने घाला केतु सुप जीस्का ज्ञान है; योगीश्वरम्‌; विदित हुआ हे योग स्वरुप जीनकु; अनेकमेकम - थात्‌ परमेश्वर एक जी है, और अनेक जी हे; जाववं एक, उठ्यल अनेक; अर्थात्‌ श्वर पदमे देत जाव नहीं, ईश्वर पद्‌ एक दी रूप दे. एत्यादि नामो से तथा ज्ञान, स्वरूप र निर्मल रूप कीततेन करते ই. प्रारियाः-यद्‌ तो मानतुङ्नी ने ऋ षन देव अवतार वी स्तुति की दै, सि€ ख- আনু ছুস্বহ क तो नदीं! जेनीः-ऋषनदेवजी क्या अनादि अ-




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