राजस्थानी लोकगीत | Rajasthani Lok Geet

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Rajasthani Lok Geet by Dr. Purushottalam Menaria

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हूँ. हैं. शब्दों में लोकगीत ही जनता की भाषा है लोकगीत हमारी समूची सस्कृति के पहरेदार हैं । स्व० रामनरेश त्रिपाठी ने लोकगीतो के लिए प्रकृति के उद्गार लिखा है । स्व० पं० मोत्तीलाल शास्त्री ने लोकगीतो की महत्ता इस प्रकार बताई है-- मानवस्वरूप के शरीर मन दुद्धि और श्रात्मा चारो तत्वों में प्रथम तीन से सुसम्बन्धित क्रिया सम्यता कहलाती है आर चौथे आत्मत्तत्व से सम्बन्धित क्रिया संस्कृति । लोकगीत वास्तव मे श्रात्म तत्व से श्रनुप्नाणित होने से सस्कृति के प्रतीक हैं । डॉँ० सत्येन्द्रजी ने लोकगीतो को निर्माता मे निर्माण के श्रहूं चैतन्य से शुन्य होना लिखा है । परी के मतानुसार लोकगीत श्रादिमानव का उल्लास- मय संगीत है । मेरिया लीच ने डिक्शनरी झ्राफ फॉकलोर में लोकगीतो की निम्नलिखित विशेषताएं बताई हैं-- १. लोकगीत लोक समूह मे प्रचलित होते हैं । २. लोकगीतो में लोक-समूह का काव्य तथा संगीत निहित है जिसका साहित्य मोखिक परम्परा से झ्राता है लिखित श्रयवा छापे हुए रूप से नहीं । दे. लोकगीतों मे गेय तत्व श्ौर चृत्य की घुन श्रवश्य होती है परन्तु नृत्य युरा सम्पूर्ण लोकगीत साहित्य के लिए श्रनिवाय॑ नहीं । कुछ व्यावसायिक तथा अन्य प्रकार के गीत साधारण रागो के भी होते हें जो कि नृत्य के लिए उपयुक्त नहीं ।




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