श्री जैन प्रतिबोध चिन्तामणि भाग - १ | Jain Pratibodh Chintamani Bhag - 1
श्रेणी : साहित्य / Literature
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
324
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(१६)
बाप वीय माता स्द्रने-जीवा, याधेखीनो आहार
भृरुगथो. जन्म्यां . परे जीवा, शरी करे जडार
॥ जीवा ॥ १६ ॥ आठक्रोड सुइेलाल करी जीवा,
আদব माङि! अटदुणि तिणिसू वेदना जीवा, स-
हीते गलोवाल ॥1 जीवा १७ ॥ जम्मता कोड
गुणी कदी जीवा, जरतां क्रोडा क्रोड जन्ल सरणः
नी जीवने जीवा,ए ऊ म्देदी खोड ४ जीदा १८ ॥
ইহা अनाश्ज उपन्थो जीवा, ईन दणि यःय ॥
ওত জা জানা ইন जादा,दलन कादा जाय |
'॥जीवां॥ १९ ॥ कदियक मंर्कव पावियोजीवा;
इचम कुछ अवतार ॥ देहनिरो गीणपावी नदी जीवा,
धटी আনা অলাহ || जोदा | ९० ॥ ठगफासी-
मगर सोरडा जीवा, झीमर कराई पाल ॥ उपजी
ने ममो नदी जीवा, अलो सही कोई जात ५
৯১৬ ০২ रे
जीवा 1२१ ॥चवदेदौीराज्चरोकमें जोरा, जन्म
মহতালা ভীত ॥ -बालांगरमात्रपर्श, इजावा
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