मिरातुल ऊरूस | Miratul Aurus

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Miratul Aurus by नजीर अहमद - Najeer Ahmad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बाब पहला तमहीद के तौर पर औरतों के लिखने-पढ़ने की जरूरत प्रौर उनकी हालत के मुनासिब कुछ नसीहते जो आदमी दुनिया के हालात में कभी गौर नहीं करता उससे ज्यादा कोई भ्रहमक नहीं । गौर करने के वास्ते दुनिया में हजारों तरह की बातें हैं। लेकिन सबसे उम्दा और ज़रूरी ग्रादमीका श्रपनाहालह कि जिस रजसे भ्रादमी पैदा होता है ज़िन्दगी में उसको क्या-क्या बातें पेश आती भर क्योंकर उप्तकी हालत बदला करती है । इ सानी ज़िन्दगी में सबसे ग्रच्छा वक्‍त लड़कपन का है । इस उम्र में आदमी को किसी तरह का फिक्र नहीं होता । माँ- बाप निहायत शफ़क़त और मुहब्बत से उसको पालते और जहाँ तक बस चलता है उसको आराम देते हैं प्रौलादके ` ग्रच्छा खाने प्रर अच्छा पहनने से माँ-बाप को खुशी होती है। बल्कि मां-बाप भ्नौलाद केश्राराम के वास्ते श्नपने उपर तकलीफ तमहीद--प्रस्तावना; गौर करना--ध्याव लगाकर सोचना; श्रहमक-- मू्ल। शफ्कत-प्यार, मेहरबानी । ४.




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