जैन साहित्य का ब्रिहद् इतिहास | Jain Sahitya Ka Brihad Itihas

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
350
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ५५ )प्रथम दु दारा विभिन्न सेदो के विनार प्र+द ऊिये गये है।
दूसभ सूप--रहस्यतोधिफारी (अ० ९ सूत्र २)जेघानन्द बनाते ए कि रन्यो फो अनने থালা है विमान चलाने फा
सिरो से सतना है। इस झर की व्याख्या फरते हुए यो ल्पिते एँ --विमानरचने व्योमागेहणे चलने तथा।
स्तस्भने गमने चित्रगतिधगादिनिणैये ॥
दैमानिफ रषस्यार्यतानसाधनमन्तया।
यतो संमिद्दिनेंति सूत्रेण चर्णितम॥अर्थात् निस वैमानिफ व्यक्तिः फो अनेन प्रर के सद्य, रेते परिमानं ननि,
उसे आराझ में उड़ाने, चलाने तथा आकादा में दी सकने, पुन चडाने, चिय-
विचिच प्रमर की অনিক गतियाँ फे चनि फे जत मिमान की विधे আবহ में
विशेष गतियों का निर्गय फरना जानता घ यही अधिकारी ऐ सकता है,
दूसग नहीं ।वृत्तिमार और भी रिखते ६ फि रस्याय आटि अनेक पुराफाल फे विभान-
शान्तियों ने “रट्यल्ट्री” आदि प्रषों मे जो पताया है उसके अनुमार संक्षेप में
वर्णेन स्ता हं) जेतव्य £ कि भरद्ान ऋषि के रचे “वैमानिक प्रकरण” से
पहले कर् अन्य आचारयों ने मी विमान विपयक अथ छिसे & উই ৮नारायण और उसका लिखा ग्रथ 'विमानचन्द्रिका!
घोनक५ श्योमयानतत्रः
गर्ग हा ০০০]
चांचस्पति ,, শ্বাননিন্তু?
चाफ्रायणि ,, व्योमयानाकी
ঘুতিতনাষ + 'सेव्यानप्रदीषिका' |भरद्वान जी ने इन शार्सो का भी भलीभाति अवलोकन तथा विचार करके“बैमानिकप्रकरण” की परिभाषा को विस्तार से छिपा है--यह स7 वहाँ लिखा
हुआ है।रहम्यलद्दरी में ३२ प्रकार के रहस्य वर्णित हैं ;---एतानि द्वात्रिशद्रदस्यानि गुरोमु खात्।
विज्ञानविधिवत् सर्व पदचात् काय समारभेत् ॥
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