हमारा ग्राम-साहित्य | Hamara Gram Sahitya

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRamnaresh Tripathi
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10.73 MB
कुल पष्ठ :
424
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about रामनरेश त्रिपाठी - Ramnaresh Tripathi
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)है. हरे )२९--खेती की कद्दावतें !२४--बुमौवल् श्रौर ढकोसले |२४--नये-नये शब्द श्रौर मद्दावरे ।२५.---मनुष्य श्रौर पशु के रोगों के नुस्खे, ।
२६--पेशेवरों के शब्द ।२७--जड़ी-बूटियों की पहचान श्रौर उनके उपयोग ।
र८--मुसलमानों के घरों में प्रचलित गीत ।गाँव का स्वरूपझसली हिन्दुस्तान शहरों में नहीं, गाँवों में है । शहरों में
अरब शऔर योरप घुस श्राये हैं; पर गाँव की मूल संस्कृति श्र
प्रकृति श्रमीतक उसी हालत में है, जिस हालत में वह चन्द्रगुंस
और श्रशोक के जमाने में रही होगी । श्रन्तर पड़ा है तो केवल
घन का | पहले-जैसा धन श्रब गाँवों में ' नहीं दे, बल्कि घोर
निध॑नता है। पर निर्धनता का उसकी नींव पर झमीतक बहुत दी
कम प्रमाव पड़ा दे |गाँव को गाँव की हृष्टि से देखिये, तमी वह सुन्दर मालूमहोगा । गाँव को भ्रन्द्र से देखिये, तभी उसकी सम्पूणुता समक
में झमी जो इम गाँववात्लों को श्रसम्य; गंदे श्र
पाते हैं, उसका पहला कारण ते उनकी झसझ
गरीबी है; और दूसरा यह कि हम उन्हें योरप की आँखों से देखते
हैं, इसीसे उनमें श्रसंखय तरुटियाँ दिखाई पढ़ती हैं | हम' में: उनकी
घुदियाँ ही देखने का श्रम्यास भी ढाला गया है | उनकी तरुदियाँ
ही जुटियाँ हमें बताई भी जाती हैं श्रौंर हम उन्हे श्रपनी प्रखर
प्रतिमा से बढ़ाते भी रहते हैं, इससे उनसे हमें घृणा दोती जाती है ।'
User Reviews
No Reviews | Add Yours...