आदर्श महिला | Aadarsh Mahila

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Aadarsh Mahila by Shri Ramchand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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् अआदश महिला पहला प्रति रावश भी एक दिन सीता के रूप-गुश की प्रशंसा सुनकर उन्हें पाने की इच्छा से आया था किन्तु घनुष को चढ़ाने जाकर हास्यास्पद हुआ । रावण झपने भाग्य की इस हसी को नहीं समझ सका । सीता की माहिनी मूति उसके मानस-नत्र के सामने नाचने लगी मानो सब-नाश कोई सुन्दर मूति घरकर उसकी अआँखां के सीमने चमकने लगा | हैं... झुप्रयाध्या-नरेश राजा दशरथ एक दिन दरबार में बेठे थे इतने में महषि विश्वासिन्र ने वहाँ झ्ाकर राजा का आशीवाद दिया | महाराज के प्रदयाम करने पर विश्वामित्र ने तपावन में राचस-राचसियों के उत्पात से मुनियां को निचिघ्न यज्ञ करना कठिन हे गया है । महाराज मेंने एक यज्ञ करने का संकल्प किया- हैं किन्तु रा्षस-राच्सियां का उत्पात साचकऋर उसकी सफलता में मुभ्दे सन्देह होता है। आप क्षत्रिय राजा हैं। दुखी का दुख दूर करके राज-ध्म का पालन कीजिए | मद्दाराज ने पूछा-- इस विषय में महर्षि की क्या आज्ञा है? से कद्दा-झापक दा पुत्र रास शरीर लव घनुर्विद्या में बहुत निषुण हैं माने साक्षात्‌ धनुर्वेद से राम-लच्मण रूप से अवतार लिया है। इसलिए आप राच्स-राच्षसियें उपद्रव से यज्ञ की रच्हा करने के लिए राम अर लच््मण को मेरे साथ कर दीजिए । यज्ञ पूरा दाद ही वे राजधानी को लोाट | राजा दशरथ ने दु खित मन से का जाने दिया । रामचन्द्र लच्मण महषपि विश्वामित्र के साथ निषिड़ वन से ह्कर जाते थे । इतने में देखा कि ताइका नाम की राच्षसी सु




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