जागते रहो सोने वालो | JAAGTE RAHO SONE VALO

JAAGTE RAHO SONE VALO  by गोरख पाण्डेय - GORAKH PANDEYपुस्तक समूह - Pustak Samuh

लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :

गोरख पाण्डेय - GORAKH PANDEY

No Information available about गोरख पाण्डेय - GORAKH PANDEY

Add Infomation AboutGORAKH PANDEY

पुस्तक समूह - Pustak Samuh

No Information available about पुस्तक समूह - Pustak Samuh

Add Infomation AboutPustak Samuh

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
समकालीन कहीं चीख़ उठी है अभी कहीं नाच शुरू हुआ है अभी कहीं बच्चा हुआ है अभी कहीं फ्रौजें चल पड़ी हैं अभी । (1981) 28 ग्रांखें देखकर ये आँखें हैं तुम्हारी तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुंदर इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए। क्‍ (1978) 29




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now