विज्ञान के अचरज | WONDERS IN SCIENCE

WONDERS IN SCIENCE by अरविन्द गुप्ता - ARVIND GUPTAपुस्तक समूह - Pustak Samuhसैन्ड्रा मार्केल - SANDRA MARKEL

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सैन्ड्रा मार्केल - SANDRA MARKEL

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आप देखेंगे कि हवा, थोड़ी-सी हवा वाले गुब्बारे में से लगभग पूरे भरे गुब्बारे मे जाती है। क्या आपको यह देख कर आश्वर्य हुआ? ऐसा क्यों हुआ? ऐसा क्यों होता है? जब गुब्बोरे का खर खंचता है, तब वह अपने अंदर की पर कुछ दबाव डालता है। गुब्बारे में जितनी अधिक हवा ,, उतना ही अधिक गुब्बारे का खर खिंचेगा और वह उतना पतला होगा। और, गुत्बारे की 'वमड़ो' जितनी ही पतली होगी, वह अंदर की हवा पर उतना ही कम दवाव डालेगी। (आपने शायद ध्यान दिया हो कि शुरू में गुब्बारे को फुलाने में ज्यादा दम लगाना पड़ता है। जब गुब्बागा थोड़ा फूला छोता है, तब उसको और अधिक एलाने में कम बल लगता है) क्योंकि कम फूले गुब्बारे के अंदर हवा पर अधिक दबाव है, इसलिए यह हवा ज्यादा फूले गुत्ारे की ओर बहती है। जब कम फूला गुत्बार एकदम छोटा हो जायेगा, जैसे कि बिना फूला हो, तब उसमें से हवा का बहना रुक जायेगा। क्या आप पास रखे दो गुब्बारों को फूँक मारकर अलग कर सकते हैं? दो युल्रे लग्के हैं और एक-दूसरे को लगभग छू रहे है अगर आप इनके बीच में ज़ोर से फुँकेंगे तो क्या होगा? क्या गुब्बारे एक-दूसरे से दूर चले जायेंगे? या वे और पास आ जायेंगे? या अपनी पूर्व स्थिति पर ही टिके रहेंगे? पहले आप अनुमान लगायें और फिर नीचे सुझाए तरीके से परीक्षण करके असलियत का पता करें। यह प्रयोग करने के लिए आपको एक साथी की मदद लेनी होगी। आवश्यक सामानः ७ दो बिल्कुल एक-जैसे गोलाकार गुब्बारे ७30 सेंटीमीटर लम्बे धागे के दो दुकड़े पहले दोनों गुब्बारे को पूरी तरह फुला ले। दोनों गुब्बारे के मुँह पर एक-एक धागा बाँधें।




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