चतुर कौन ? | CHATUR KAUN?

CHATUR KAUN? by गीता आयंगर - GEETA AAYANGARपुस्तक समूह - Pustak Samuh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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“हां तुमने तो कहा था कि गायें सदैव घास को अपने आप ही काट दिया करती थीं , शेर गुर्राया । “तो अब कया हुआ ? * “टेखो, गायें घास चरने न तो उस दिन आयी थीं और न ही उसके पहले दिन । चूंकि उन्होंने घास को नहीं काटा, तभी चरागाह में घास बहुत बड़ी हो गयी थी जिसमें बगुलों के घोंसले को देखना मुश्किल था । पिता बिल्कुल ठीक कह रहा था और जब उसने अपनी पत्नी को समझाया तो वह भी मान गयी । मगर उन्हें अभी तक घोंसला ढूंढ़ने का तरीका नहीं सूझा था | शेर खान ! अगर तुम उनकी जगह होते तो कया करते ?” गणपति ने पूछा । “मैं गायों को चरागाह में चरने के लिए लाता शेर ने उत्तर दिया । “बिल्कुल ठीक !” गणपति ने कहा । “ठीक यही बगुलों ने भी करने की कोशिश की थी । >-..आााा अकिनम:....त नस 2+ मम: अ-+-4 मिस... कि




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