गायें गाना , खेलें खेल | GAAYEN GANA, KHELEN KHEL

GAAYEN GANA, KHELEN KHEL by नरेन्द्र सहगल - NARENDRA SAHGALपुस्तक समूह - Pustak Samuh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गायें गाना, खेलें खेल क्यों ? क्‍यों ? क्‍यों ? क्यों? क्यों? क्‍यों? क्यों आसमान में जगमग करते तारे, और इन्द्र-धनुष में रंग-सतरगे प्यारे, क्यों गुड़हल होता सुर्ख एकदम लाल, क्यों झिलमिल करता है मकड़ों का जाल ? ' क्यों? क्‍यों ? क्‍यों ? आम नीम और इमली क्यों एक जगह हैं ठहरे, क्यों सागर में ऊंची-ऊंची गिरती पड़ती लहरें, कोवे, तोते फर-फर-फर क्‍यों आसमान में उड़ते, क्यों बिल्ली के तन पर दो - दो पंख नहीं हैं उगते ? क्यों ? क्‍यों ? क्‍यों ? क्यो ? क्‍यों ? क्‍यों ? क्यों जुगनू की पीठ पर जलती हुई मशाल है, क्यों गेंडे, हाथी की पीठ चलती-फिरती ढाल है, क्यों पहाड़ की चोटी देखो सूनी और वीरान है, क्यों हंसती आँखों में भाई आँसू का सैलाब है ?




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