संघर्ष की पुकार | SANGHARSH KI PUKAR
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
9
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(४)
हम खामोश रहे ।
अब, 0580
सेठों की पार्टी भाजपा,
भाजपा की सरकार,
सरकार की पुलिस,
- इस पुलिस नें दस्तक दौ है
मेरे दरवाजे पर.........
मेरा साथ कौन देगा ?मुझे तो कोई दिखता भी नहीं है। 'क्या मजदूरों को बिखारने के लिये सेठों का हमला होता रहेगा
लूट का राज चलता रहेगा ?यह सोचने का वक्त है ।यही निर्णय लेने का वक्त है । .बी.एस.पी. के मंनेजिग डायरेक्ट र, ध्मंपाल ग॒प्ता, सिम्पलेक्स,
बी. आर. जैन, विजय केडिया और खेतावत ने एकता बनाई है ।
मजदूरों को बुचलने के लिये,गृण्डों को लगा दियः है,और गुण्डों की हिफाजतसाथ ही मजदूरों की मरम्मत के काम कोअंजाम देने के लियेगुण्डों के सःथ लगी पुलिस'देशभक्ति और जनसेवा'के नाभ पर |जब बी.ज॑.पी. और बी.एस.पी. एक हो जाते हैतब भिलाई की मजदूर बस्तियों में,भातंक का राज होता हैचाक् ओर भाले चला करते हैं मजदूरों पशमजदूर नेताओं को सड़ाया जाता हैजेल की कालौ कोटरी में,(५)
और, स्थाई नौकरी
जीने लायक वेतन मांगने वालों को
भूख से तड़फाया जाता है ।। यही सोचता हें,सोच की तीत्रता से भिच जाती है मट्टठियाँ
भूख की मार से तन भले कमजोर हैपर मरा नहीं है मेरा आत्मविश्वासऔर उसी विश्वास कें बल परमेरी बंद मटठी लह्दरा उठती है. आसमान में।
जेल की कोटठरी सेनिस्तब्ध रात्रि में सुनवाई देती हैभिलाई के दूर-दराज की मजदूर बस्तियों से
उठती आवाजइंकलाब जिदाबाद ।। इंकलाब जिदाबाद ।।छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
का प्रचार पत्र से
६-२०-€ १
User Reviews
No Reviews | Add Yours...