बच्चे और सरकार | BACHCHE AUR SARKAR
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
50
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)28 बच्चे और सरकारपरिपक्व हैं कि वे लोकतंत्र तथा कानून की ज़रूरत जैसी अवधारणाओं को
समझ सकते हैं। राजनैतिक समाजीकरण के अध्ययनों में तथा बच्चों की
विश्व दृष्टि में रुचि रखने वाले लोग अक्सर यह मानते हैं कि बच्चों में एक
स्तर तक यह समझ होती है कि 'सत्ता' और 'शक्ति' की कार्यविधि क्या
होती है। वे बच्चों के इन अनुभवों को अन्य संस्थाओं, जैसे स्कूल, सह-
समूह (०७८ छ्ा०५०), परिवार, मीडिया आदि के सन्दर्भ में रख उन्हें विश्लेषित
करते हैं। समाज की दूसरी संस्थाओं में सत्ता व शक्ति की इस समझ का
उपयोग क्या राजनैतिक शक्ति व सत्ता की समझ विकसित करने के लिए
किया जा सकता है? इस प्रश्न के कुछ उत्तरों को पाने का प्रयास अध्ययन
के अन्तिम भाग में किया गया है।2. बच्चों के साथ चर्चाएँअध्ययन के इस भाग में हम बच्चों के साथ सरकार के तीन पक्षों पर हुई
चर्चाओं को प्रस्तुत करेंगे। ये पक्ष हैं: 1) सरकार का गठन ब पाठ्यपुस्तक
में इसका वर्णन, 2) सरकार के कार्य और पाद्यपुस्तकों में उसे किस तरह
समझाया गया है, और 3) सरकार का ढॉचा तथा उसके तीन अंग।सरकार का गठन:वास्तविक घटनाएँ और पाठ्यपुस्तको का ज्ञानसरकार के गठन पर चर्चाएँ इसलिए की गई थीं ताकि पाठ्यपुस्तकों में दिए
गए ज्ञान को उसके सन्दर्भ में रखा जा सके तथा बच्चों के इस विषय में
जो विचार हैं उनकी पड़ताल की जा सके। ये चर्चाएँ 1999 में की गई थीं।
हमारी चर्चाओं से पहले एक के बाद एक तीन चुनाव हो चुके थे। दो चुनावों
से केन्द्र सरकार का गठन हुआ था और तीसरा विधानसभाओं का चुनाव
था। अतः: हमें लगा कि बच्चे इन चर्चाओं में भागीदारी के लिए सक्षम
स्थिति में थे।चुनावहमने चर्चा कुछ मूलभूत प्रश्नों से प्रारम्भ की, जैसे : 1) बोट कौन दे सकता
है? 2) बच्चे के चुनाव क्षेत्र का क्या नाम है? 3) उस चुनाव क्षेत्र में कौन-
कौन से उम्मीदवार खड़े हुए थे? 4) ये उम्मीदवार किन राजनैतिक दलों के
थे7 और 5) चुनाव किसने जीता?बच्चों के ज़्यादातर समूहों को इन सवालों पर चर्चा करने में दिक्कत नहीं
हुई। ऐसा इसलिए सम्भव हुआ क्योंकि चुनावों को समसामयिक स्थानीय
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