भगवान बुध्द - जीवन और दर्शन | BHAGWAN BUDDH - JEEVAN AUR DARSHAN

BHAGWAN BUDDH - JEEVAN AUR DARSHAN by अरविन्द गुप्ता - Arvind Guptaधर्मानन्द कोसम्बी - Dharmanand Kosambi

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धर्मानन्द कोसम्बी - Dharmanand Kosambi

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पुस्तक समूह - Pustak Samuh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मूमिका पालिज्वाइ मय में तिपरिटक (ब्रिपिटक) नाम का नो प्रस्थन्गगुदाय प्रमुख है, उतठके तीन भेद हैं--सुत्तव्रिटका, विनयरिटका और क्षमिप्ररमपिटक! । 'मृत्तपिदक! में प्रधानवया दुद्ध और इनझे श््यरत्रिष्यों के दवदर्गों का गंग्रड है । दितवदिदश” में मिश्लुओं के आचरण द सम्वस्ध में दुद्ध द्वारा बताये गए गिमगो, इनक दताने के छारमों, समद-समप्र पर इदसे सियये गए वरियर्तगों और उसकी टोश्शों का संग्रह है 1 ऋमिप्रस्परिटिक में दाद अध्याय है | उनमें युद के उपदेश ह दावे बडे दिमाग हैं। 6वटिक्ाय! में भौंडीर दृढ़ सजा ट्र दर्द अप अर्य ही दशद (टरुते) 1 12! ट्र ट्र आर्ट हे दिःवलिशार! अडते है 1 हे रब




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