ग्रेगोर मेंडल पादरी जिसने मटर उगाई | GREGOR MENDEL PADRI JISNE MATAR UGAI

GREGOR MENDEL PADRI JISNE MATAR UGAI  by अरविन्द गुप्ता - Arvind Guptaचेरिल -CHERIL

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उस ज़माने में किसी को यह नहीं पता था कि क्‍यों, किसी लड़के की अपने पिता जैसी नीली आँखें और सीधे बाल होते हैं, और क्‍यों उसके भाई की माँ जैसी भूरी आंखें, और घुंघराल्ेे बात्र होते हैं. ग्रेगोर का मानना था कि पेड़-पौँधे और जीव सभी, एक ही तरीके अपने बच्चों को अपनी विशेषताएं (ट्रेट्स) प्रसारित करते थे. यह कैसे होता था? ग्रेगोर प्रकृति के उस नमूने को खोजना चाहता था और उससे सभी जीवित चीज़ों के उद्गम के रहस्य पर प्रकाश डालना चाहते था.




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