श्रुति - रत्नावली | Shruti-ratnavali

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शान्तिपाठ श्रुतियाँ ् &* हमारा कल्याण हो, मन पवित्र कीजिये । 3” शान्ति: दान्ति: शान्ति: ॥प॥४ ४“ हे देवा ' हम कानोंसे कल्याणरूप वचन सुनें । ध्यान करने- वालें हम नेत्रों से कस्याणरूप देखें ! स्थिर अंगोट्टारा सुचम श्रुतियोंसे स्तुति करें । हे देवों ! ायुभर हम हित प्राप्त करे । महान्‌ कीतिवाछा इन्द हमको झानन्द देवे । विश्वका जाननेवाछा सर्य हमको आनन्द देवे । अकुश्डित गतिवाला गरुड़ हमको आनन्द देवे । बृहस्पति हमको आनन्द देवे। 2 शान्ति शान्ति शान्ति: ॥६॥ डे जो ब्रह्माको पूर्व धारण करता है और जो उसके लिये वेदोंको देता है, श्रात्मबुद्धिके परकाशख्प उस प्रसिद्ध देवकी शरणमे मैं समझ जाता हू । उँ* शान्ति: शान्ति. शान्ति ॥१०॥ अद्र्ति८च-




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