श्री मुहम्मदबोध और काफिरबोध | Shri Mohammad Bodh Aur Kafirbodh
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
54.73 MB
कुल पष्ठ :
132
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बोधसागर । (१३३माॉकाम ३३
ढ ते आगे लायो डोरी । सुमेरते सुन्य अठारह कोरी ।
येतो अघर सुन्य अस्थाना । जबरुत मोकाम इंसाको
इसा पेगम्बर पढ़े किताबा । इसका नाम इंजील किताबा
सलामालेक तहँँ दम कीना । दस्ता बोस उनइ उठि लीन
तहूँवा बेठि विस्वभर राई। वही पीर तो वहीं. खुदाईइद्दँते अपर सृन्य है भाई । ताकी शोभा कही. न जाई
माॉकामस | ४दाझन्यकों लागी डोरी । ग्यारह पालँग तहाँ ते सोरी।लाहुत मॉकाम कहावे सोइ । जो. देखे बहुते सुख होई।झस्तफा पेगंबर बैठे तहेँ । फुरकान किताब पढतथे जहीँ ।. सलामालेक तहाँ दम कीना । दस्ताबोस इउनईइ उठि लीना ॥देखतही मुद्दम्मद अस्थाना । तुम बेचन कहो यहीं ठेकाना ।वारो फिरिश्ते सलामालेक कीना । तब इम आगेका पग दीन
माकाम्। ५. .तहूँते चठे अचित ढेकाना । एक असंख्य सुन्य परमाना ॥दाहूत मोकामको वद्दी ठेकाना । आगे दे सोह बंधाना ॥
माकाम। हैतीन असख्य झुन्य परमानी। बाहुत मोकाम सो कहो बखानी॥नवी कवीर चले तेहि आगे | मूल. सुरति बैठे. अनुरागे॥
नाकान | ७
बाँच असख सुब्न बिच आहदी। सात मोकाम कहत हे. ताही
झाकाम ।<८छा!सुरतिके पहुँच द्वीप । चार असंख दे लोक समीप
'ताको नाम राहृत मोकामा । नबी कबीर पैंहुचे तेहि ठाम
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