लबड घोंघों | Labad Ghonghon

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Labad Ghonghon by श्री बदरीनाथ भट्ट - Shree Badareenath Bhatt

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पुराने हाफ्मि साहब का नया नौकर १७ हा नौकर--( सौटकर ) जी ! देख श्ाया | हाकिम--कॉन है नौकर--एक श्रादमी । हाकिंम-- सेमलाकर ) जाकर पृ, कौन है; कहाँ का है, क्या नाम है, कया चाहता हे-- नोकर---( उंगलियों पर गिनता हुमा जाप-ही-आप ) यानी इतनी बाते पूछुनी है--एक--कौन है; दूसरी--कहोँ का दे ; तीसरी--क्या नाम है ; चौथी--क्या चाहता हैं । देखिए, ही याद रह जायें तभी हैं । (गया ) हाकिम--धीरे-घीरे सब काम समभक लेगा: अभी नया बॉगड हैं । नौंकर--( लॉटकर श्याप-ही-ग्राप ) आखिर वहीं हुआ न; जिसका मुफे डर था ! ( हाकिम से ) हजूर, उन सब सवालों का जवाब तो मुभे याद नहीं रहा; पर हाँ, आपसे मिलना चाहता है, यह वात पक्की समभिए--भूठी हो तो एक-एक चवनी शर्ते-- हाक्मि--( कोथ से ) कैसे कपड़े पहने है ? नौकर--मजे के हैं : हो, बुरे नही, हजूर के कपड़ों से अच्छे हैं । हाकिम--( श्राप-ही-ब्राप ) बजीव गधा हैं । ( नौवर से ) श्र हम जो तुमसे कह चुके है कि जरूरत से ज़ियादा न वोला कर?




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