श्रीमद्भगवद्गीता वाक्यार्थ बोधिनि भाषा टीका | Shrimad Bhagvat Gita Vakyarth Bodhini Bhasatika

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Shrimad Bhagvat Gita Vakyarth Bodhini Bhasatika by रघुनाथ प्रसाद - Raghunath Prasad

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रघुनाथ प्रसाद - Raghunath Prasad

Add Infomation AboutRaghunath Prasad

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
|, गीतावाक्यावबीधिनी भापादीका उ पुत्र था, परंतु राजा छतराष्ट्र जन्मांध थे;इसवास्ते राज्यकाये सव दुर्योधनके स्वाधीनथा,जव राजायुधिष्ठिरकों चापडखेलाई छल कारिके राज्य लेलिया ओ वनवास दिया, जब ये वनवास- से आये ओ राज्य मागा तब इन्होंने राज्य न दिया, इसलिये चुद्धके वास्ते कुरुक्षेत्रकों चलने लगे;तब छुतरानेनी तयारीकी , , ब व्यासजीने कहा कि,तुम नेञ्नबिना युद्धमे क्या करागें? तब धतराष्ट्रवोले की.हम युद्धकादचांतहीसुनाकरेंगि,लोलुनिकेव्या- सझीने कहा की, यह संजय तुझारा सपरथी हमार शिष्प है, इसको हप्षवरदान देते हैं सो इसको इहां्द, बेठे सब त्ृत्तांत ह- प्िंगोचर होयगा, सो सुनिके राजा हतराष्ट्र हस्तिनापुरहीमेरहे और सब कुरुक्षेत्रम जायकेयुड्का भारंभ किया तहाँ, अजजनने देखाकि दाने सेनॉमेहसारेदी सुहूद,मसित्रओं कुटुंबी है, इनको हम कैसे मारें ऐसा समुझिके घनुपवान डारि दिया ओ रथभेप- श्राज्ञाग्मे जा बैठा, जब श्रीकृष्णने देखा कि, इस अजेनने अ-' पना क्षत्रियधर्म त्यागी दिया ओ धर्मत्यागनेसे इसका कल्या- णन होयगा.हसवास्ते,इसकों तत्वज्ञानका उपदेश करना-ाहि थे, जब यह स्वधममें प्रवते होयगा, ऐसाविचारिके गीताशास्तर पंदेशा किया, सोड़े गीता श्रीमन्‍्महाभारतमे वेदव्यासजीनेय- क्त किया, तिसमें सर्व छोक श्रीरप्णसुखारबिंदनिर्मित हैं जी कुछ लोक परंध रचनाकेवास्ते व्यासजीने भी निमाण किय हैं. 7 पं प्रषम सछोफ एतरा्रके प्रश्नका है, छतराष्ट्र संजयसे पूंछाहे मूलम- बे शृतरा्ट्र उधाचा घमकेत्रेकरुक्षेत्रसमवेत्तायय॒त्स चः ॥ मामकाःपांडवा श्वेवकिमकुवेतसं जय ॥ १ ॥ >ू




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now