पृथ्वीराज में प्रणाम | Prithviraj mai Pranam

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
168
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)1११
(४) दरिद्र रो दान
बे जादयो ही हो तो आया बयो हा ?
जदनरेई थे आद्वो तो विदा मांगता ही आप्रो हो।
माचक | मैं तो थारी दान-ब्ीरता री घणी प्रशंशा सुण रासी ही, पर भा
उट्टी रीत बयों ?
जे जाव्रशो ही हो तो काया बयों हा ?
महारे और थारो कोई पता रो संबंध है काई? ओर जे नहीं, तो बस रहार हो
बने मागण नै बयों बातों हो ?
हूँ दरिद्, दरिद्र सू भी दरिद्, हूं और ये हो म्हारा सप्रेस्त। लो, देखो ! इण वार
पाने ही त्याग त्याग रो थाद्श देखाऊ हूं ।
जे जाद्णों हो हो तो आया बयो हमारे
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